ईरान में अमेरिकी हमले की आशंका: भारत ने नागरिकों को दी चेतावनी
ईरान में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, जिसके चलते अमेरिका ने अपने सैन्य कर्मियों को निकालने की सलाह दी है। भारत ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की चेतावनी दी है। ईरान में विरोध प्रदर्शन अब राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुके हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। इस संकट का वैश्विक राजनीति पर भी गहरा असर पड़ सकता है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
Jan 14, 2026, 18:07 IST
क्या ईरान पर अमेरिकी हमला संभव है?
क्या ईरान पर कभी अमेरिकी हमला हो सकता है? यह सवाल तब उठता है जब अमेरिका ने कतर में अपने सैन्य बेस से कर्मचारियों को निकालने की सलाह दी है। इसी बीच, भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि स्थिति तेजी से बिगड़ रही है, इसलिए उन्हें बिना देरी के ईरान छोड़ देना चाहिए। भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे भीड़-भाड़ वाले स्थानों से दूर रहें और जल्द से जल्द भारत लौटने की योजना बनाएं। छात्रों, व्यापारियों और पर्यटकों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। दूतावास का कहना है कि मौजूदा हालात में सुरक्षा की गारंटी देना कठिन होता जा रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने नागरिकों के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं.
अमेरिकी सैन्य कर्मियों की निकासी
कतर के अल उदैद एयर बेस पर तैनात कुछ अमेरिकी सैन्य कर्मियों को आज शाम तक क्षेत्र छोड़ने की सलाह दी गई है। यह कदम ईरान के साथ बढ़ते तनाव और मध्य-पूर्व में संभावित सैन्य कार्रवाई की आशंकाओं के बीच उठाया गया है। अल उदैद एयर बेस मध्य-पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है, जहां लगभग 10,000 सैनिक तैनात हैं। अमेरिका ने यह कदम सतर्कता के दृष्टिकोण से उठाया है। पिछले साल जून में ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों से पहले भी अमेरिका ने अपने कुछ सैनिकों और उनके परिवारों को मध्य-पूर्व के बेसों से हटाया था, जिसके बाद ईरान ने कतर स्थित इसी एयर बेस पर मिसाइल हमला किया था.
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत आर्थिक समस्याओं से हुई थी, लेकिन अब यह राजनीतिक बदलाव की मांग में बदल चुका है। कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पों की घटनाएं सामने आई हैं। हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट और संचार सेवाओं पर सख्त पाबंदियां लगा दी हैं, जिससे आम लोगों की आवाज़ बाहर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। हालांकि, कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें अस्पतालों के बाहर लाशों का अंबार और सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत दिखाई दे रही है. रिपोर्टों के अनुसार, अब तक प्रदर्शनों के दौरान हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और सैंकड़ों को गिरफ्तार किया गया है.
ईरान के सुप्रीम लीडर का बयान
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई ने विदेशी दखल का आरोप लगाते हुए कहा है कि देश “शत्रुओं के षड्यंत्र” का सामना कर रहा है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ईरान को वेनेजुएला समझने की गलती न करें। ईरान की सरकार सरकारी टीवी चैनलों और समर्थक रैलियों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों को अराजक तत्व बताते हुए जनता से संयम रखने की अपील कर रही है.
अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। उन्होंने ईरान में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के समर्थन में बयान दिए हैं, जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठा सकता है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान में प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतारना जारी रहा, तो अमेरिका दखल देगा। उन्होंने ईरान में हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अगर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा जारी रही, तो अमेरिका कठोर प्रतिक्रिया देगा.
अंतरराष्ट्रीय तनाव
अमेरिका और रूस के बीच ईरान को लेकर कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि अमेरिका ईरान के संकट के समाधान के लिए सहायता उपलब्ध कराएगा, हालांकि उन्होंने इसका स्वरूप स्पष्ट नहीं किया। रूस ने अमेरिका की कार्रवाइयों को गंभीर परिणामों के रूप में बताया है और चेतावनी दी है कि ईरान के मामलों में बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है.
वैश्विक प्रभाव
ईरान में भड़का मौजूदा जनआंदोलन अब केवल एक देश के भीतर सत्ता और जनता के टकराव की कहानी नहीं रह गया है। यह संकट धीरे-धीरे वैश्विक राजनीति, सामरिक संतुलन और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है। भारत द्वारा अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह देना इस बात का संकेत है कि हालात को अब केवल आंतरिक अस्थिरता के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय फैलाव की आशंका गंभीर हो चुकी है.
ईरान का सामरिक महत्व
ईरान का भौगोलिक और सामरिक महत्व इस संकट को और गंभीर बनाता है। यह देश न केवल ऊर्जा संसाधनों का बड़ा केंद्र है, बल्कि कई अहम समुद्री और व्यापारिक मार्गों के समीप स्थित है। यदि यहां लंबे समय तक अस्थिरता बनी रहती है, तो वैश्विक तेल और ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं, जिससे महंगाई और आपूर्ति संकट का असर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंचेगा.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चेतावनी
यह संकट अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक चेतावनी है कि किसी देश की आंतरिक आग को भू-राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश अंततः पूरी दुनिया को झुलसा सकती है। ईरान का भविष्य अब केवल तेहरान की सड़कों पर नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति के फैसलों में भी तय होगा.