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ईरान में आर्थिक संकट: कैसे संघर्ष ने जीवनशैली को बदल दिया?

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष ने देश में आर्थिक संकट को जन्म दिया है, जिससे आम लोगों की जीवनशैली में बड़े बदलाव आए हैं। महंगाई और नकदी की कमी ने लोगों को अपने पुराने सामान बेचने और किराए पर लेने के लिए मजबूर कर दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं पर भी इसका गंभीर असर पड़ा है, जिससे परिवार अब दवाओं के लिए किस्तों में भुगतान करने को मजबूर हैं। जानें इस संकट के पीछे की कहानी और इसके प्रभावों के बारे में।
 

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष का प्रभाव


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा संघर्ष अब छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। इस लंबे समय तक चलने वाले युद्ध ने न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों को प्रभावित किया है, बल्कि आम ईरानी परिवारों के जीवन को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। तेहरान की सड़कों से लेकर दूर-दराज के कस्बों तक, महंगाई और नकदी की कमी ने एक नई 'सर्वाइवल इकोनॉमी' को जन्म दिया है। लोग अपने प्राकृतिक बाल, पुरानी इत्र की बोतलें, पहने हुए जूते और पुराने कपड़े बेचने को मजबूर हैं ताकि बुनियादी जरूरतें पूरी कर सकें। इसके साथ ही, इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदने के बजाय उन्हें किराए पर लेने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।


ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कबाड़ से नकदी जुटाने का चलन

ईरानी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू सामानों से संबंधित क्लासिफाइड ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर ऐसी चीजों की बिक्री में अचानक वृद्धि हुई है, जिन्हें सामान्य दिनों में बेकार समझा जाता था। लोग अब अपने पुराने सामान को बेचकर नकद जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।


किराए पर सामान लेने का नया ट्रेंड

आर्थिक तंगी ने नागरिकों की खरीदारी की आदतों को पूरी तरह बदल दिया है। पहले जो लैपटॉप जैसे सामान स्टेटस सिंबल माने जाते थे, अब उन्हें केवल अल्पकालिक उपयोग के लिए किराए पर लिया जा रहा है। बच्चे ऑनलाइन क्लास में भाग लेने के लिए या कामकाजी लोग ऑफिस के प्रोजेक्ट्स के लिए महंगे लैपटॉप खरीदने की स्थिति में नहीं हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए शांति वार्ता का यह दौर अंतिम अवसर बताया है।


स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट का असर

जुलाई के अंत तक देश की वार्षिक मुद्रास्फीति 66 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जिसका सबसे बुरा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है। परिवार अब बुनियादी दवाओं और इलाज के खर्च को उठाने के लिए किस्तों में भुगतान (EMI) का सहारा ले रहे हैं।