ईरान में इंटरनेट पर नियंत्रण: खामेनेई सरकार का नया कदम और स्टारलिंक की भूमिका
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का दमन
नई दिल्ली: ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार पिछले 18 दिनों से विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में जुटी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, और हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है। देश के विभिन्न हिस्सों में कम से कम 280 स्थानों पर प्रदर्शन जारी हैं, जिनमें धार्मिक शासन की नीतियों, आर्थिक संकट और गाजा व लेबनान में आतंकवादी समूहों को समर्थन देने के खिलाफ आवाज उठाई जा रही है।
स्टारलिंक से मिली उम्मीद
जब इंटरनेट सेवाएं ठप हो गईं, तब अमेरिकी अरबपति एलन मस्क की स्टारलिंक सेवा ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए एक आशा की किरण बनकर उभरी। लगभग 80 मिलियन ईरानियों के लिए डिजिटल अंधकार के बीच, स्टारलिंक ने बाहरी दुनिया से संपर्क स्थापित करने का एक साधन प्रदान किया। प्रदर्शनकारियों ने इस तकनीक का उपयोग करके तस्वीरें और वीडियो साझा कर अपने आंदोलनों को वैश्विक स्तर पर फैलाया।
स्टारलिंक पर सरकारी नियंत्रण
हालांकि, ईरानी सरकार ने अब स्टारलिंक सेवा पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। प्रारंभ में अपलिंक और डाउनलिंक में 30% बाधा उत्पन्न हुई, जो अब 80% से अधिक हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि खामेनेई शासन ने महंगे सैन्य स्तर के जैमिंग उपकरणों का उपयोग कर किल स्विच सक्रिय कर दिया है, जो संभवतः रूस या चीन से प्राप्त किए गए हैं।
ट्रंप का समर्थन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में इंटरनेट बहाल करने के लिए मस्क से संपर्क करने की योजना बनाई है। उन्होंने खामेनेई शासन को चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की जाती है, तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरानी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
डिजिटल ब्लैकआउट
स्टारलिंक की तकनीक स्थानीय दूरसंचार नेटवर्क पर निर्भर नहीं करती है, लेकिन ईरानी जैमर ने इसे निष्क्रिय कर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, उपग्रहों के जीपीएस संकेतों को बाधित करने वाले ये उपकरण नागरिक संचार को भी प्रभावित कर सकते हैं और गंभीर स्वास्थ्य जोखिम उत्पन्न कर सकते हैं।
जीपीएस और स्टारलिंक जैमिंग सिस्टम
रूस और चीन ने पहले ही जीपीएस और स्टारलिंक जैमिंग में अपने सैन्य स्तर की तकनीक का प्रदर्शन किया है। रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान उपग्रह संचार को बाधित किया, जबकि चीन ने इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सिमुलेशन में स्टारलिंक को बाधित करने की क्षमता दिखाई है।