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ईरान में इंटरनेट पर बढ़ती पाबंदियाँ: क्या नागरिकों का डिजिटल संपर्क खत्म होगा?

ईरान में इंटरनेट पर बढ़ती पाबंदियों के चलते नागरिकों का वैश्विक डिजिटल संपर्क खत्म होने की कगार पर है। सरकार की नई नीति के अनुसार, केवल चुनिंदा व्यक्तियों को ही इंटरनेट का उपयोग करने की अनुमति होगी। इस योजना के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है। क्या ईरान में स्वतंत्र इंटरनेट का युग समाप्त हो रहा है? जानें इस लेख में।
 

ईरान की इंटरनेट नीति में बदलाव


नई दिल्ली: ईरान एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां आम नागरिकों का वैश्विक इंटरनेट से संपर्क समाप्त होने की कगार पर है। डिजिटल अधिकारों के कार्यकर्ताओं और निगरानी संगठनों का कहना है कि ईरानी सरकार इंटरनेट को नागरिकों का मूल अधिकार मानने के बजाय इसे एक नियंत्रित सरकारी सुविधा में बदलने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। यदि यह योजना लागू होती है, तो अधिकांश नागरिक केवल सरकारी संचालित राष्ट्रीय इंटरनेट तक ही सीमित रह जाएंगे।


आंतरिक सुरक्षा के तहत इंटरनेट नियंत्रण

रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम ईरान की आंतरिक सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सूचना के प्रवाह पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार के संकेत बताते हैं कि आने वाले वर्षों में खुला और स्वतंत्र वैश्विक इंटरनेट ईरान में एक पुरानी बात बन सकता है।


गुप्त योजना का खुलासा

इंटरनेट सेंसरशिप पर नजर रखने वाली संस्था फिल्टरवॉच के अनुसार, यह योजना अचानक नहीं बनी है, बल्कि इसे लंबे समय से तैयार किया जा रहा है। भविष्य में केवल वही लोग वैश्विक इंटरनेट का उपयोग कर सकेंगे, जिन्हें सरकार द्वारा विशेष सुरक्षा मंजूरी प्राप्त होगी या जो आधिकारिक जांच प्रक्रिया में सफल होंगे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2026 के बाद खुले इंटरनेट की वापसी की संभावना बहुत कम है।


जनवरी से इंटरनेट बंदी का प्रभाव

ईरान में 8 जनवरी से अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट लगभग पूरी तरह से बंद है। यह निर्णय सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद लिया गया, जिनमें हजारों लोगों की मौत की खबरें आईं।
इस लंबे और कठोर इंटरनेट बंदी की तुलना 2011 में मिस्र के तहरीर स्क्वायर आंदोलन के दौरान की गई बंदिशों से की जा रही है। सरकार का आधिकारिक रुख है कि अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कम से कम 20 मार्च तक बंद रहेगा।


चुनिंदा लोगों को इंटरनेट की अनुमति

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान पहले से ही 'व्हाइटलिस्टिंग' तकनीक का उपयोग कर रहा है। इसके तहत कुछ चुने हुए व्यक्तियों को सीमित और फ़िल्टर किया हुआ वैश्विक इंटरनेट मिलता है, जबकि आम नागरिक इससे पूरी तरह वंचित रहते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रणाली में चीनी तकनीक का सहारा लिया गया है, जिससे सरकार पूरे देश के इंटरनेट ट्रैफिक पर कड़ी निगरानी रख सकती है।


अर्थव्यवस्था और समाज पर प्रभाव

अमेरिकी विदेश विभाग के एक पूर्व अधिकारी ने इस योजना को "डराने वाली और बेहद महंगी" बताया है। उनका कहना है कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान होगा और देश का सांस्कृतिक व सामाजिक जुड़ाव दुनिया से टूट जाएगा।
डिजिटल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सरकार को भले ही अल्पकाल में नियंत्रण मिल जाए, लेकिन लंबे समय में इसकी कीमत ईरानी समाज और आम जनता को चुकानी पड़ेगी।