ईरान में खामेनेई की मौत के बाद अयातुल्लाह अराफ़ी बने अंतरिम सुप्रीम लीडर
ईरान में ऐतिहासिक बदलाव
नई दिल्ली : शनिवार का दिन ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ है। अमेरिका और इजराइल के गंभीर सैन्य हमले में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, देश में नेतृत्व का संकट उत्पन्न हो गया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईएसएनए के अनुसार, अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। अराफ़ी अब उस अस्थायी नेतृत्व परिषद का हिस्सा हैं, जो नए सर्वोच्च नेता के चुनाव तक ईरान की शासन व्यवस्था को संभालेगी।
अंतरिम परिषद के तीन नेता
ईरान के संवैधानिक नियमों के अनुसार, इस अंतरिम परिषद में राष्ट्रपति मसूद पजेशकियान और मुख्य न्यायाधीश घोलम-होसैन मोहसेनी-एजेई भी शामिल हैं। ये तीनों अनुभवी नेता मिलकर देश की वर्तमान अनिश्चितता को संभालेंगे। इसके अलावा, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) के प्रमुख जनरल मोहम्मद पकपूर की मृत्यु के बाद अहमद वहीदी को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। वहीदी अब इस शक्तिशाली सैन्य बल की कमान संभालेंगे और हमले के बाद देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे।
अयातुल्लाह अलीरेज़ा अराफ़ी का परिचय
67 वर्षीय अलीरेज़ा अराफ़ी का जन्म 1959 में ईरान के यज़्द शहर में हुआ था। वे एक प्रतिष्ठित धार्मिक और राजनीतिक व्यक्तित्व हैं, जिन्हें अयातुल्लाह की उपाधि प्राप्त है। अराफ़ी पहले अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति रह चुके हैं और 2013 से पवित्र शहर क़ोम में जुमे की नमाज़ पढ़ा रहे हैं। उनकी धार्मिक शिक्षा प्रणाली पर गहरा प्रभाव है, जो ईरान की न्याय व्यवस्था और वैचारिक दिशा को प्रभावित करता है।
खामेनेई के करीबी सहयोगी
अराफ़ी लंबे समय से खामेनेई के विश्वसनीय सहयोगी रहे हैं और 2019 में गार्जियन काउंसिल के सदस्य बने। यह संस्था ईरान में चुनावों और कानूनों की समीक्षा करने वाली सबसे शक्तिशाली संस्था है। वे सांस्कृतिक क्रांति की उच्च परिषद और धार्मिक मदरसों के प्रबंधन में भी सक्रिय रहे हैं। 2021 में, उन्हें असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स का सदस्य चुना गया। उनके पास धार्मिक सिद्धांतों और जटिल राजनीतिक कार्यों का व्यापक अनुभव है, जो वर्तमान सुरक्षा संकट में सहायक होगा।
आधुनिक दृष्टिकोण
अराफ़ी की एक प्रमुख विशेषता उनकी प्रगतिशील सोच है। जबकि खामेनेई के बेटे मोजतबा को परंपरावादी माना जाता है, अराफ़ी आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग के समर्थक हैं। उनका मानना है कि इस्लामी सभ्यता को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए धार्मिक संस्थाओं को नई तकनीकों का उपयोग करना चाहिए। उनकी यह दृष्टि उन्हें ईरान के अन्य रूढ़िवादी नेताओं से अलग बनाती है।
भविष्य की चुनौतियाँ
ईरान के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि न केवल देश ने अपना सर्वोच्च नेता खोया है, बल्कि सैन्य नेतृत्व में भी बड़ा बदलाव हुआ है। अराफ़ी के नेतृत्व वाली अंतरिम परिषद का मुख्य कार्य देश में आंतरिक शांति बनाए रखना और एक नए स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव करना है। पूरी दुनिया की नजरें अब अराफ़ी के कूटनीतिक निर्णयों पर हैं, क्योंकि उनकी नीतियों से यह तय होगा कि ईरान और इजराइल के बीच तनाव किस दिशा में बढ़ेगा।