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ईरान में चार देशों की बैठक: क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा

26 अक्टूबर को तेहरान में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर चर्चा की गई। इस बैठक का महत्व इसलिए बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी है। क्या ये देश अमेरिका की रणनीति से अलग एक नया रास्ता खोज रहे हैं? जानें इस बैठक के पीछे के उद्देश्य और क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाएं।
 

मिडिल ईस्ट में तनाव और चार देशों की बैठक

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच भी टकराव की स्थिति बनी हुई है। अमेरिका द्वारा ईरान पर संभावित हमले की चर्चाओं के बीच, मिडिल ईस्ट में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। इसी बीच, 26 अक्टूबर को तेहरान में एक महत्वपूर्ण घटना घटी, जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के उच्च अधिकारी ईरान पहुंचे। इन चार देशों के प्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया। यह सवाल उठता है कि जिन देशों के हित भिन्न हैं, वे अचानक एक साथ क्यों आए हैं? क्या ये देश मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने का प्रयास कर रहे हैं, या फिर अमेरिका की रणनीति से अलग एक नया रास्ता खोजने की कोशिश कर रहे हैं?


बैठक का महत्व और उद्देश्य

बैठक की मेज़बानी ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसेन रिजाई ने की। इसमें सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर, और तुर्की की खुफिया एजेंसी के प्रमुख इब्राहिम कलीन शामिल हुए। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागच्ची भी इस बैठक में उपस्थित थे। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि चारों देश क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए संवाद जारी रखेंगे। हालांकि, किसी नए सैन्य समझौते या संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था की घोषणा नहीं की गई। इस बैठक का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है।


ईरान की अपील और क्षेत्रीय सहयोग

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशियान ने भी पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने इस्लामी देशों से आपसी मतभेदों को दूर कर एकजुट होने की अपील की। पेजेशियान का कहना था कि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए बाहरी ताकतों पर निर्भर रहने के बजाय पड़ोसी देशों को मिलकर काम करना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने भी बैठक को क्षेत्रीय सुरक्षा की दिशा में एक व्यावहारिक कदम बताया। उनके अनुसार, पिछले दो वर्षों की घटनाओं ने यह साबित किया है कि आपसी भरोसे के बिना स्थायी शांति स्थापित करना कठिन है।


अमेरिका की रणनीति से अलग रास्ता?

बैठक के संदर्भ में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये देश अमेरिका की रणनीति से अलग अपना रास्ता तैयार कर रहे हैं? पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की एक रक्षा समझौते के सदस्य हैं, जिसे मक्का रक्षा समझौते के नाम से जाना जाता है। इस समझौते के बाद, तीनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की ईरान की यह पहली संयुक्त यात्रा है। ईरान चाहता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय पश्चिमी देशों के बजाय स्थानीय देशों द्वारा लिए जाएं। ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ाकर सुरक्षा का एक ऐसा ढांचा तैयार किया जा सकता है जिसमें बाहरी हस्तक्षेप की आवश्यकता कम हो।