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ईरान में छात्रों का नया विरोध: क्या फिर से उठेगी सरकार के खिलाफ आवाज?

ईरान में छात्रों ने नए सेमेस्टर की शुरुआत पर फिर से सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया है। पिछले महीने के बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद, जहां हजारों लोग मारे गए थे, अब छात्रों ने अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ नारेबाजी की। तेहरान के शरीफ विश्वविद्यालय सहित कई अन्य विश्वविद्यालयों में भी प्रदर्शन हुए। छात्रों ने आर्थिक कठिनाइयों और धार्मिक शासन के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। जानें इस आंदोलन की पूरी कहानी और ईरान में असंतोष की स्थिति।
 

ईरान में फिर से छात्रों का प्रदर्शन


नई दिल्ली: पिछले महीने ईरान में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को सुरक्षा बलों ने बुरी तरह से दबा दिया था, जिसमें हजारों लोग मारे गए थे। अब, नए सेमेस्टर की शुरुआत के साथ, छात्रों ने फिर से सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। शनिवार को कई विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए, जहां छात्रों ने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ कड़े नारे लगाए।


तेहरान के शरीफ विश्वविद्यालय में छात्रों का जमावड़ा

तेहरान के मशहूर शरीफ प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सैकड़ों छात्र एकत्र हुए, जिन्होंने काले कपड़े पहने थे, जो पिछले प्रदर्शनों में मारे गए लोगों की याद में था। वीडियो में छात्रों को "तानाशाह मुर्दाबाद" और "खामेनेई हत्यारा" जैसे नारे लगाते हुए सुना गया।


कुछ छात्रों ने निर्वासित शाह के बेटे रजा पहलवी को नया नेता बनाने की मांग की। इस दौरान भीड़ में धक्का-मुक्की हुई और झड़पें शुरू हो गईं, जिसमें प्रदर्शनकारी और सरकार समर्थक गुट आमने-सामने आ गए।


अन्य विश्वविद्यालयों में भी विरोध का विस्तार

प्रदर्शन केवल तेहरान तक सीमित नहीं रहे। अमीर कबीर विश्वविद्यालय, बेहेश्ती विश्वविद्यालय और मशहद विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने सड़कों पर उतरकर "आजादी" और सरकार विरोधी नारे लगाए। मानवाधिकार समूहों ने वीडियो जारी किए, जिनमें छात्रों की बड़ी संख्या दिखाई दी।


पश्चिमी शहर अब्दानन में एक शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद लोग सड़कों पर आए और "तानाशाह मुर्दाबाद" और "खामेनेई मुर्दाबाद" के नारे लगाए। यह शहर पहले से ही विरोध का केंद्र रहा है।


सुरक्षा बलों की कार्रवाई

सरकार ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी अर्धसैनिक इकाइयों को तैनात किया। बसिज मिलिशिया ने छात्रों पर हमला किया, जिससे कई लोग घायल हुए। सरकारी समाचार एजेंसी ने विश्वविद्यालयों में घायलों की खबर दी। प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके और सुरक्षा बलों से भिड़ंत की।


पिछले दमन की याद

पिछले विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों की मौत हुई थी। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि असली संख्या इससे कहीं अधिक है। सरकार ने इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश बताया, लेकिन छात्र अब भी आक्रोशित हैं।


वे आर्थिक कठिनाइयों, दमन और धार्मिक शासन से परेशान हैं। ये नए प्रदर्शन यह दर्शाते हैं कि ईरान में असंतोष खत्म नहीं हुआ है और स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है।