ईरान में नए साल पर भड़के विरोध प्रदर्शन: क्या है इसके पीछे का कारण?
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की स्थिति
ईरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ पिछले एक सप्ताह से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने नए साल के आगमन के साथ हिंसक मोड़ ले लिया है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन झड़पों में कई प्रदर्शनकारियों की जान गई है, जबकि सुरक्षा बलों में से भी एक सदस्य की मौत की सूचना है। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब देश गंभीर आर्थिक संकट और राजनीतिक दबावों का सामना कर रहा है।
विरोध प्रदर्शनों का विस्तार
नए साल के आगमन के साथ, विरोध प्रदर्शन केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी फैल गए हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के अनुसार, हाल की झड़पों में कम से कम तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी टकराव की घटनाएं हुई हैं, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
छात्रों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन
तेहरान में विश्वविद्यालयों के छात्रों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कुछ स्थानों पर 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले के शासक शाह मोहम्मद रजा पहलवी के समर्थन में भी नारे लगाए गए। अमेरिका में निर्वासन में रह रहे उनके बेटे रजा पहलवी ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि मौजूदा शासन के रहते देश की आर्थिक स्थिति और बिगड़ती जाएगी।
महंगाई और आर्थिक संकट
ईरान में पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति के खिलाफ यह सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। पश्चिमी प्रतिबंधों और कमजोर अर्थव्यवस्था के कारण महंगाई दिसंबर में 42.5 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुद्रा के गिरते मूल्य और बढ़ती कीमतों से परेशान होकर कई शहरों में दुकानदारों और व्यापारियों ने भी प्रदर्शन शुरू कर दिए, जो बाद में हिंसक झड़पों में बदल गए।
मौतों की खबरें और सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया
पश्चिमी ईरान के लोरदेगान, कुहदाश्त और इस्फ़हान जैसे क्षेत्रों से मौतों की खबरें आई हैं। सरकारी और गैर-सरकारी स्रोतों के अनुसार, कुछ स्थानों पर सशस्त्र प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ भी हुई। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े बासिज स्वयंसेवी बल के एक सदस्य की मौत और कई अन्य के घायल होने की पुष्टि की गई है।
मानवाधिकार संगठनों के आरोप
मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया है कि कई प्रदर्शनकारियों की मौत गोली लगने से हुई, जबकि सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हालात का फायदा उठाकर हिंसा फैलाने की कोशिश की गई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। सरकार ने हालात से निपटने के लिए दोहरी नीति अपनाई है। एक ओर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है, वहीं दूसरी ओर व्यापारियों और श्रमिक संगठनों से बातचीत का संकेत भी दिया गया है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, राजनीतिक असंतोष और हालिया अंतरराष्ट्रीय तनावों ने इस आंदोलन को और हवा दी है। हाल के वर्षों में महिलाओं के अधिकारों, सूखे और आर्थिक संकट को लेकर हुए प्रदर्शनों की तरह यह विरोध भी ईरानी नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।