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ईरान में प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की धमकियों पर रूस की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई की धमकियों ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। रूस ने इन धमकियों को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। मॉस्को का कहना है कि ऐसे कदम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता के लिए खतरा बन सकते हैं। रूस ने ईरान में भड़के प्रदर्शनों के पीछे गहरी सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को बताया है। जानें इस जटिल स्थिति में रूस और अमेरिका की भूमिका क्या है।
 

नई दिल्ली में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी


नई दिल्ली: ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के संदर्भ में अमेरिका द्वारा संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनियों ने वैश्विक राजनीतिक परिदृश्य में हलचल पैदा कर दी है। इस पर रूस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अमेरिका के रुख को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताया है और इसके गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है।


रूस का सख्त रुख

रूसी विदेश मंत्रालय ने ईरान के खिलाफ अमेरिका की किसी भी सैन्य कार्रवाई को “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया है। मंत्रालय ने कहा कि ऐसे कदम मध्य पूर्व और उससे आगे "विनाशकारी परिणाम" ला सकते हैं।


मॉस्को ने इन धमकियों को उकसाने वाला बताते हुए कहा कि तेहरान पहले से ही आंतरिक चुनौतियों का सामना कर रहा है और बाहरी दबाव स्थिति को और बिगाड़ सकता है।


अमेरिका के टैरिफ और प्रतिबंधों पर रूस की प्रतिक्रिया

रूस ने ईरान के व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ बढ़ाने के अमेरिकी प्रयासों की भी आलोचना की। मॉस्को ने इसे अमेरिका का "बेशर्म प्रयास" करार दिया और कहा कि यह इस्लामी गणराज्य को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की कोशिश है।


रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे सीधे तौर पर आर्थिक ब्लैकमेल बताया है।


विरोध प्रदर्शनों की जड़ें

रूस के अनुसार, ईरान में भड़के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के पीछे गहरी सामाजिक और आर्थिक समस्याएं हैं, जो लंबे समय से चले आ रहे पश्चिमी प्रतिबंधों का परिणाम हैं।


मॉस्को ने आरोप लगाया कि "शत्रुतापूर्ण बाहरी ताकतें" इन हालात का फायदा उठाकर ईरानी सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं और हिंसा भड़काने के लिए विदेशों से "विशेष रूप से प्रशिक्षित और सशस्त्र उकसाने वाले" भेजे गए हैं।


मौतों और गिरफ्तारियों की संख्या

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी (HRANA) के अनुसार, बुधवार सुबह तक ईरान में कम से कम 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है।


इनमें 2,403 प्रदर्शनकारी, 147 सरकारी सहयोगी, 12 बच्चे और 9 आम नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा, अब तक 18,100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।


इंटरनेट बंद होने से जानकारी की पुष्टि में कठिनाई

ईरान में इंटरनेट पूरी तरह ठप होने के कारण स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करना बेहद कठिन हो गया है। एसोसिएटेड प्रेस ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि में आने वाली दिक्कतों का उल्लेख किया है।


तेहरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक मौतों का आंकड़ा जारी नहीं किया गया है। यह संख्या 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद किसी भी बड़े आंदोलन में हुई मौतों से कहीं अधिक बताई जा रही है।


रूस की नागरिकों के लिए सलाह

मॉस्को ने उम्मीद जताई है कि हालात धीरे-धीरे स्थिर होंगे। साथ ही, ईरान में मौजूद रूसी नागरिकों से भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की गई है।


भूराजनीतिक तनाव में वृद्धि

रूस का यह बयान मॉस्को और तेहरान के मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है और क्षेत्र में अमेरिकी प्रभाव के मुकाबले रूस की भूमिका को भी उजागर करता है।


अमेरिकी धमकियों को विरोध प्रदर्शनों के "शोषण" से जोड़ते हुए रूस ने वाशिंगटन को एक अस्थिरता पैदा करने वाली ताकत के रूप में पेश किया है। इससे स्पष्ट है कि ईरान संकट के बीच कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।