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ईरान में बच्चों की मौत: क्या ट्रंप की नीतियों ने बढ़ाई संकट की आग?

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में नागरिकों की मौत का सिलसिला जारी है। हाल ही में, तेहरान टाइम्स ने मिनाब के स्कूल पर हुए हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें प्रकाशित की हैं। इस हमले में 165 से 175 बच्चे मारे गए, जिनमें अधिकांश लड़कियां थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान का हमला बताया, जबकि तेहरान टाइम्स ने उनके बयान को झूठा करार दिया। ईरान में अब तक 1255 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 200 बच्चे शामिल हैं। जानें इस संघर्ष का स्वास्थ्य प्रणाली पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।
 

संघर्ष में नागरिकों की जानें जा रही हैं


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे संघर्ष में नागरिकों की मौत का सिलसिला जारी है. ईरान के सरकारी समर्थक अंग्रेजी अखबार 'तेहरान टाइम्स' ने अपने फ्रंट पेज पर दक्षिणी शहर मिनाब के एक प्राथमिक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में मारे गए बच्चों की तस्वीरें छापी है.


मिनाब स्कूल पर हुआ भयानक हमला

इस हमले में 28 फरवरी को मिनाब के शजारेह तैय्येबा गर्ल्स एलीमेंट्री स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें 165 से 175 बच्चे मारे गए, जिनमें से अधिकांश लड़कियां थीं जो कक्षा में पढ़ाई कर रही थीं. ईरानी मीडिया और जांच में यह दावा किया गया है कि यह हमला अमेरिकी टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से किया गया, जो केवल अमेरिका के पास है.


स्कूल के निकट एक नौसैनिक अड्डा था, जिसे लक्ष्य बनाया गया था, लेकिन हमले का असर स्कूल पर भी पड़ा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ईरान का हमला बताया और कहा कि ईरान के हथियारों में सटीकता की कमी है.


तेहरान टाइम्स का ट्रंप पर तीखा प्रहार

तेहरान टाइम्स ने ट्रंप के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वे झूठ बोल रहे हैं. अखबार ने आरोप लगाया कि ट्रंप अपने हमलों की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहे हैं और कूटनीति के रास्ते को नकार रहे हैं.


फ्रंट पेज पर छपी तस्वीरें बच्चों के चेहरों को दर्शाती हैं, ताकि दुनिया युद्ध की क्रूरता को समझ सके. अखबार ने इसे युद्ध अपराध के रूप में पेश किया और निर्दोष बच्चों की मौत को नजरअंदाज नहीं करने की बात कही.


ईरान में मौतों का आंकड़ा बढ़ा

ईरान के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर अली जाफरियन ने जानकारी दी कि अमेरिका और इजराइल के हमलों में अब तक 1255 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 200 बच्चे और 11 स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं. अधिकांश मौतें आम नागरिकों की हुई हैं, जो अपने घरों या काम पर थे.


12 हजार से अधिक लोग घायल हुए हैं. हमलों के कारण 52 स्वास्थ्य केंद्र, 18 इमरजेंसी सेवाएं और 15 एम्बुलेंस क्षतिग्रस्त या नष्ट हो गई हैं. तेल सुविधाओं पर हमलों से स्वास्थ्य जोखिम भी बढ़ गया है.


युद्ध का प्रभाव

यह युद्ध पिछले नौ दिनों में और तेज हो गया है. ईरान के अधिकारी बताते हैं कि हमले सैन्य ठिकानों के अलावा आवासीय क्षेत्रों, अस्पतालों और स्कूलों पर भी हो रहे हैं. बच्चों की मौत और घायलों की संख्या से स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ रहा है, लेकिन ईरान का दावा है कि दवाइयां घरेलू उत्पादन से उपलब्ध हैं. अखबार की यह तस्वीरें अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर रही हैं और युद्ध में निर्दोषों की कीमत पर सवाल उठा रही हैं.