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ईरान में बढ़ता तनाव: सैन्य कमांडरों और नागरिक सरकार के बीच टकराव

ईरान में अमेरिका के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, ईरानी सत्ता में दो विपरीत विचारधाराएं उभरकर सामने आई हैं। एक ओर, 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) अमेरिका के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की सरकार कूटनीतिक समाधान की तलाश कर रही है। क्या ईरान का यह आंतरिक गतिरोध पश्चिम एशिया की दिशा तय करेगा? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में।
 

नई दिल्ली में बढ़ते सैन्य तनाव की कहानी


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच, ईरानी सत्ता में भी विभाजन स्पष्ट हो रहा है। 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर ईरान के सैन्य कमांडरों और लोकतांत्रिक सरकार के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं। जहां एक ओर ईरान की सेना का सबसे शक्तिशाली हिस्सा, 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC), अमेरिका के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए तैयार है, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की सरकार कूटनीतिक समाधान की तलाश में है।


ईरान की दो विपरीत विचारधाराएं

विश्लेषक केनेथ कैट्ज़मैन के अनुसार, ईरान में इस समय दो अलग-अलग और विरोधाभासी विचारधाराएं सक्रिय हैं। IRGC के शीर्ष कमांडर और कट्टरपंथी गुट मानते हैं कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा नियंत्रण उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है। उनका मानना है कि यह केवल समुद्री मार्ग को अवरुद्ध करने तक सीमित नहीं है, बल्कि सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की भावना भी इसमें शामिल है।


IRGC और नागरिक सरकार के बीच टकराव

सैन्य कमांडरों के इस कठोर रुख के विपरीत, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ जैसे नागरिक नेता युद्ध से बचने के पक्ष में हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निर्वाचित सरकार देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति को देखते हुए और अधिक प्रतिबंध या सैन्य नुकसान नहीं सहन करना चाहती। इसलिए, पेजेशकियान सरकार ओमान की मध्यस्थता से अमेरिका के साथ बैक-चैनल वार्ता फिर से शुरू करने की कोशिश कर रही है।


अमेरिका की स्थिति और वैश्विक चिंता

वाशिंगटन ने अपनी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से गुजरता है। इसे खुला रखना अमेरिका की राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकता है। व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी है कि इस व्यापार मार्ग को बाधित करने के किसी भी ईरानी प्रयास का सख्त सैन्य जवाब दिया जाएगा।


समझौता या युद्ध का खतरा?

अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह आंतरिक गतिरोध आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की दिशा तय करेगा। यदि IRGC के कट्टरपंथी अपने रुख पर अड़े रहे और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रयास किया, तो अमेरिका की ओर से बड़े पैमाने पर सैन्य हमले की संभावना है। दूसरी ओर, यदि राष्ट्रपति पेजेशकियान का कूटनीतिक धड़ा IRGC को पीछे हटने के लिए मजबूर करने में सफल होता है, तो ओमान की मध्यस्थता से एक नया शांति समझौता संभव हो सकता है।