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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शन: क्या है जनता का गुस्सा?

ईरान में पिछले 12 दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। जनता का गुस्सा खुलकर सड़कों पर नजर आ रहा है, जबकि सरकार ने हिंसा की घटनाओं को स्वीकार किया है। अमेरिका की चेतावनी और आर्थिक संकट के कारणों पर चर्चा करते हुए, यह लेख ईरान की जटिल स्थिति को उजागर करता है। क्या सरकार इस असंतोष को संभाल पाएगी? जानें पूरी कहानी में।
 

ईरान में हालात की गंभीरता


मध्य पूर्व के देश ईरान में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। पिछले 12 दिनों से विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं। सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश सड़कों पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। गुरुवार रात को हालात और भी बिगड़ गए, जब राजधानी तेहरान सहित 100 से अधिक शहरों में हिंसक प्रदर्शन हुए।


हिंसक प्रदर्शन और सरकारी संपत्तियों को नुकसान

प्रदर्शनों के दौरान कई स्थानों पर आगजनी की घटनाएं हुईं। सरकारी इमारतों और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें आई हैं। इसके अलावा, कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की भी सूचना मिली है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है। बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती के बावजूद हालात काबू में नहीं आ रहे हैं।


अमेरिका की चेतावनी और ईरान का प्रतिक्रिया

इन घटनाओं के बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई की गई, तो इसका गंभीर परिणाम होगा। इस बयान के बाद, ईरान ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि ईरान सरकार किसी भी संभावित खतरे के प्रति सतर्क है।


सरकारी टीवी की चुप्पी टूटी

लंबे समय तक मौन रहने के बाद, अब ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार हिंसा की घटनाओं को स्वीकार किया है। एक कार्यक्रम के दौरान यह माना गया कि प्रदर्शनों के दौरान हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ लोगों की जान भी गई है। यह स्वीकार्यता बताती है कि स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि इसे छिपाना संभव नहीं रहा।


अर्थव्यवस्था का संकट

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि देश में चल रहा आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी जनता के गुस्से का मुख्य कारण हैं। आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है, जिससे असंतोष बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सरकार के लिए स्थिति को संभालना आसान नहीं रह गया है।