ईरान में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर ओवैसी और अब्दुल्ला की अपील
भारतीय छात्रों की सुरक्षित निकासी की मांग
नई दिल्ली: AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय विदेश मंत्रालय से अनुरोध किया है कि ईरान में अध्ययन कर रहे भारतीय छात्रों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जाए। ओवैसी ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा ईरान के विदेश मंत्री से बातचीत को सकारात्मक बताया, लेकिन यह भी कहा कि केवल बातचीत से काम नहीं चलेगा। ज़मीनी स्तर पर ठोस और त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि छात्र सुरक्षित रूप से भारत लौट सकें।
इंटरनेट बंद होने से छात्रों की मुश्किलें
ओवैसी ने बताया कि कई माता-पिता उनसे संपर्क कर रहे हैं और उनकी चिंता बढ़ती जा रही है। विशेष रूप से तेहरान के शाहिद बेहेश्टी यूनिवर्सिटी में 70-80 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से 5-8 हैदराबाद के हैं। पूरे ईरान में सैकड़ों भारतीय छात्र इस समय डर और असहायता का सामना कर रहे हैं। इंटरनेट पूरी तरह से बंद होने के कारण परिवारों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। कई अभिभावक अपने बच्चों को बुलाने के लिए टिकट खरीदना चाहते हैं, लेकिन छात्रों के पास पैसे की कमी है क्योंकि वे ज्यादातर गरीब परिवारों से आते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि विश्वविद्यालय छात्रों के पासपोर्ट वापस नहीं कर रहा है, जिससे वे देश छोड़ने में असमर्थ हैं। इस स्थिति ने समस्या को और गंभीर बना दिया है।
सरकार से निकासी योजना की मांग
ओवैसी ने सरकार से अनुरोध किया कि सभी फंसे हुए छात्रों के लिए एक स्पष्ट और त्वरित निकासी योजना बनाई जाए, ताकि माता-पिता की चिंता कम हो सके और छात्र सुरक्षित घर लौट सकें।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला की विदेश मंत्री से बातचीत
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इस मुद्दे पर विदेश मंत्री से चर्चा की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि मंत्री ने उन्हें ईरान की वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी दी और बताया कि मंत्रालय क्या कदम उठा रहा है। अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के छात्रों और अन्य भारतीयों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे प्रयासों के लिए मंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
ईरान में आर्थिक संकट और प्रदर्शन
आपको बता दें कि दिसंबर 2025 के अंत में ईरान की मुद्रा रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने और महंगाई के कारण विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। ये प्रदर्शन शुरू में आर्थिक मुद्दों पर थे, लेकिन जल्द ही पूरे देश में फैलकर सरकार विरोधी विद्रोह में बदल गए। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि अमेरिका इस पर नजर रख रहा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सैन्य हस्तक्षेप की संभावना पर विचार कर रहे हैं।
3400 से अधिक लोगों की मौत
अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सरकार की कार्रवाई में प्रदर्शनकारियों पर दमन के कारण 3,400 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। इंटरनेट बंद होने और हिंसा बढ़ने से स्थिति और भी बेकाबू हो गई है। भारतीय दूतावास ने ईरान में रहने वाले नागरिकों, विशेषकर छात्रों को सलाह दी है कि वे उपलब्ध किसी भी माध्यम से देश छोड़कर चले जाएं और विरोध प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से दूर रहें।