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ईरान में युद्ध का पर्यावरण पर भयानक प्रभाव: काली बारिश और प्रदूषण का संकट

ईरान में चल रहे युद्ध का प्रभाव केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी गंभीर असर डाल रहा है। हाल ही में तेहरान में काली बारिश गिरने की घटनाएं सामने आई हैं, जो इजराइली ड्रोन हमलों के परिणामस्वरूप हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदूषण का प्रभाव दीर्घकालिक होगा और इसे साफ करना कठिन होगा। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इसके संभावित स्वास्थ्य प्रभावों के बारे में।
 

नई दिल्ली: युद्ध का व्यापक असर


ईरान में चल रहे संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य और राजनीतिक स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भी गंभीर असर डाल रहा है। तेल भंडारण स्थलों और रिफाइनरियों पर हुए हमलों से उत्पन्न जहरीला धुआं और प्रदूषण आने वाले दशकों तक लोगों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रदूषण का प्रभाव दीर्घकालिक होगा और इसे साफ करना अत्यंत कठिन होगा।


तेहरान में काली बारिश का दृश्य

8 मार्च को, तेहरान के निवासियों ने आसमान से काली बारिश गिरते हुए देखा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में शहर पर काले पानी की बारिश होती दिखाई दी। इजराइली ड्रोन हमलों ने तेहरान के बाहरी क्षेत्रों में बड़े तेल डिपो और रिफाइनरियों को निशाना बनाया।


इन हमलों के परिणामस्वरूप आग भड़क उठी और आसमान में घना काला धुआं फैल गया। यह धुआं बादलों के साथ मिलकर बारिश के रूप में शहर पर गिरा। लोग सड़कों पर काले दाग, कपड़ों पर कालिख और हवा में जलने की तीव्र गंध का अनुभव कर रहे थे।


1991 के गल्फ युद्ध की यादें ताजा

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड के केमिकल और पेट्रोलियम इंजीनियरिंग के प्रोफेसर नेजात रहमानियन ने इस घटना को 1991 के गल्फ युद्ध से जोड़ा है। उस समय इराकी सेना ने कुवैत में कई तेल कुओं में आग लगा दी थी, जिससे धुआं 1,290 किलोमीटर दूर तक फैल गया और ईरान तक पहुंचा।


उस प्रदूषण में खतरनाक तत्व जैसे कालिख, हाइड्रोकार्बन और सल्फर डाइऑक्साइड शामिल थे। एक अध्ययन के अनुसार, उस प्रदूषण ने हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने की प्रक्रिया को भी तेज किया था। प्रोफेसर रहमानियन का कहना है कि इस बार स्थिति और भी गंभीर हो सकती है क्योंकि हमले तेहरान के निकट हुए हैं।


प्रदूषण के गंभीर परिणाम

तेल जलने से उत्पन्न धुआं हवा में जहरीले कणों को फैलाता है। मिसाइलों और बमों में भारी धातुएं जैसे सीसा, कैडमियम और क्रोमियम होते हैं। विस्फोट के बाद ये तत्व हवा, मिट्टी और पानी में मिल जाते हैं। ये प्रदूषक कई वर्षों तक बने रहते हैं और उनकी सफाई महंगी साबित होती है। अब तक युद्ध में 300 से अधिक ऐसी घटनाएं हुई हैं, जो पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुकी हैं।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यह अम्लीय बारिश त्वचा को जला सकती है और फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। सांस संबंधी बीमारियों में वृद्धि हो सकती है, विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए।


तेहरान की पहले से खराब स्थिति

तेहरान पहले से ही गंभीर वायु प्रदूषण का सामना कर रहा है। यहां हवा और पानी में भारी धातुओं की उपस्थिति है। अल्बोर्ज पर्वत के कारण हवा का प्रवाह कम होता है, जिससे प्रदूषण शहर में फंस जाता है। युद्ध के हमलों ने स्थिति को और भी बिगाड़ दिया है। ईरानी अधिकारियों ने पहले लोगों को घर में रहने की सलाह दी थी, लेकिन बाद में रैलियों में शामिल होने की अपील की गई।