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ईरान में राजनीतिक संकट: कट्टरपंथियों का बढ़ता दबाव और सरकार की चुनौतियाँ

ईरान में हाल ही में अमेरिका के साथ युद्धविराम के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को कट्टरपंथियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें उन्हें सीधे धमकियाँ भी दी जा रही हैं। कट्टरपंथी गुटों का आरोप है कि सरकार ने इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों से समझौता किया है। इस स्थिति ने देश में अस्थिरता और तख्तापलट की आशंकाओं को जन्म दिया है। क्या ईरान गंभीर राजनीतिक संकट की ओर बढ़ रहा है? जानिए इस लेख में।
 

ईरान में राजनीतिक तनाव की नई लहर


नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के बाद, ईरान में राजनीतिक तनाव तेजी से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ चुका है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची को न केवल विरोध का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि उन्हें सीधे धमकियां भी मिल रही हैं। इस स्थिति ने देश में राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की आशंकाओं को जन्म दिया है।


राष्ट्रपति और विदेश मंत्री पर बढ़ता दबाव

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका के साथ बातचीत और युद्धविराम को लेकर कट्टरपंथी संगठन सरकार से बेहद असंतुष्ट हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने समझौते के माध्यम से इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों से समझौता किया है। इस नाराजगी का असर सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी देखने को मिला, जहां राष्ट्रपति के खिलाफ नारेबाजी की गई और विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर हमले की कोशिश की गई।


खुली सभा में दी गई जान से मारने की धमकी

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब एक कट्टरपंथी धार्मिक गायक ने जनसभा में राष्ट्रपति को सीधे धमकी देते हुए कहा कि यदि सर्वोच्च नेतृत्व की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो उनके खिलाफ हिंसक कार्रवाई की जाएगी। इस बयान ने ईरान की राजनीति में हलचल मचा दी और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी।


नए सुप्रीम लीडर की चुप्पी बनी चर्चा

देश के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की लगातार अनुपस्थिति भी कई सवाल खड़े कर रही है। उन्होंने अब तक न तो जनता को संबोधित किया है और न ही किसी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए हैं। इस कारण कट्टरपंथी धड़े आरोप लगा रहे हैं कि सरकार इस स्थिति का लाभ उठाकर सत्ता पर पूरी पकड़ बनाने की कोशिश कर रही है।


सरकार ने शुरू की कार्रवाई

सरकार ने कट्टरपंथी नेताओं के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। तख्तापलट की अफवाह फैलाने और गोपनीय जानकारी लीक करने के आरोप में कुछ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। माना जा रहा है कि सरकार किसी भी तरह आंतरिक अस्थिरता को बढ़ने से रोकना चाहती है।


क्या ईरान में बढ़ेगा संकट?

ईरान इस समय दोहरी चुनौतियों का सामना कर रहा है। एक ओर सरकार आर्थिक प्रतिबंधों से राहत और अंतरराष्ट्रीय तनाव को कम करने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी गुट अमेरिका और इजरायल के खिलाफ आक्रामक रुख बनाए रखने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में यदि दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ता है, तो ईरान गंभीर राजनीतिक संकट और सत्ता संघर्ष की ओर बढ़ सकता है।