ईरान में विरोध प्रदर्शनों का असर: क्या बदल सकता है वैश्विक मानचित्र?
ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों पर वैश्विक नजर
नई दिल्ली: वर्तमान में ईरान में हो रही घटनाओं पर पूरी दुनिया की निगाहें केंद्रित हैं। हाल के महीनों में सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों की एक लहर उठी है, जिसमें 2000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी लगातार बढ़ते जा रहे हैं। जनता का गुस्सा और असंतोष इतना गहरा है कि कई विशेषज्ञ इसे 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद की सबसे बड़ी सामाजिक-राजनीतिक चुनौती मानते हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है। उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है और सैन्य विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान में संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बनाई है। इस बीच, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 63 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ गई हैं, क्योंकि ईरान ओपेक का चौथा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है।
सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन
ईरान में यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, लेकिन इस बार विरोध की लहर असाधारण रूप से व्यापक और उग्र है। देश की 90 मिलियन की आबादी में इस्लामिक रिपब्लिक के प्रति विश्वास में कमी आ रही है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 10,000 से अधिक लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। प्रदर्शनकारियों में पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी और अन्य वैश्विक हस्तियों का समर्थन भी शामिल है।
इजरायल की चिंता
ईरान की स्थिति से इजरायल भी चिंतित है। अमेरिका और इजरायल दोनों ने संकेत दिए हैं कि यदि आंदोलनकारियों पर अत्याचार जारी रहा, तो वे सैन्य हस्तक्षेप कर सकते हैं। जून में ईरान और इजरायल के बीच लगभग 12 दिन तक संघर्ष हुआ था, जिसमें अमेरिका की भागीदारी भी रही। ईरान की सरकार गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों का समर्थन करती रही है, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है।
वैश्विक प्रभाव और संभावित परिवर्तन
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन केवल देश तक सीमित नहीं रहेगा। इससे जियोपॉलिटिक्स, तेल और ऊर्जा बाजार, मध्य पूर्व और वैश्विक सुरक्षा के समीकरण में बदलाव आ सकते हैं। अमेरिका और इजरायल के लिए यह समय ईरान के भीतर बदलाव लाने का सुनहरा अवसर भी माना जा रहा है। यदि इस्लामिक रिपब्लिक का ढांचा कमजोर होता है, तो वैश्विक स्तर पर शक्तियों के बीच नए समीकरण बन सकते हैं।