ईरान में सर्दी के बीच बढ़ता विरोध: क्या खामेनेई का शासन खतरे में है?
सर्दी में गरमाता सियासी माहौल
नई दिल्ली: ईरान में ठंड के मौसम में राजनीतिक स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है। राजधानी तेहरान से लेकर दूर-दराज के क्षेत्रों तक, लोग अयातुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों के नारों में गुस्सा और असंतोष स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, जिससे सरकार की चिंता बढ़ गई है।
प्रदर्शनों में प्रशासन की सख्ती
तेहरान में प्रशासन की कड़ी कार्रवाई के कारण प्रदर्शन कुछ हद तक कम हुए हैं, लेकिन अन्य प्रांतों में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है। महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था और बेरोजगारी के कारण लोग सरकार के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ कई जगह झड़पें हुई हैं, जिसमें अब तक 17 लोगों की मौत की सूचना है।
महंगाई और आर्थिक संकट का विरोध
ईरान में बढ़ती महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था ने आम जनता को परेशान कर दिया है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं अब आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। यही कारण है कि लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है और वे सरकार से जवाब मांग रहे हैं।
खामेनेई सरकार को चुनौती
प्रदर्शनों के दौरान कई वीडियो में लोग नारे लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जैसे "जब तक मुल्ला नहीं भागेंगे, हमारा ईरान आज़ाद नहीं होगा" और "मुल्लों को जाना होगा"। ईरान जैसे सख्त शासन वाले देश में इस तरह की नारेबाजी खामेनेई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
तेहरान में गिरफ्तारियां और उग्र विरोध
राजधानी तेहरान में प्रशासन ने अब तक 30 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इन्हें कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की आशंका के चलते गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, तेहरान के बाहर के क्षेत्रों में प्रदर्शन और भी उग्र होते जा रहे हैं, जिससे स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।
हड़ताल से शुरू हुआ विरोध
इन नए प्रदर्शनों की शुरुआत 27 दिसंबर को हुई हड़ताल से मानी जा रही है। तेहरान के कुछ दुकानदारों ने महंगाई और आर्थिक अस्थिरता के खिलाफ अपनी दुकानें बंद रखीं। इसके बाद यह विरोध धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में फैल गया। पुलिस की सख्ती ने आग में घी का काम किया और गुस्सा और भड़क उठा।
अजना में तनावपूर्ण स्थिति
तेहरान से लगभग 300 किलोमीटर दूर अजना शहर में स्थिति सबसे ज्यादा तनावपूर्ण बताई जा रही है। यहां आगजनी, फायरिंग की आवाजें और 'शर्म करो, शर्म करो' जैसे नारे सुनाई दे रहे हैं। ईरान की अर्ध-सरकारी न्यूज एजेंसी Fars के अनुसार, इन प्रदर्शनों में कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है।
महसा अमिनी की घटना से जुड़ा असंतोष
ईरान में विरोध प्रदर्शनों का जिक्र होते ही 2022 की महसा अमिनी की घटना याद आती है, जब 22 साल की महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। उसे हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उस समय भी पूरे देश में जबरदस्त विरोध हुआ था। मौजूदा प्रदर्शन उसी दबे हुए असंतोष का नया रूप माने जा रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों पर हमले
कुछ क्षेत्रों में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी दफ्तरों पर धावा बोल दिया और पत्थरबाजी की। इससे स्पष्ट है कि गुस्सा केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब यह सीधे सत्ता के प्रतीकों को निशाना बना रहा है।