ईरान में स्कूल पर हमले के बाद मीनाब में सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारी
मीनाब में त्रासदी का दृश्य
खुले मैदान में सफेद चाक से बने आयताकार निशान एक के बाद एक कतार में नजर आ रहे हैं। वहां खड़े लोग चुपचाप इन निशानों को देख रहे हैं, जैसे हर रेखा किसी निर्दोष जीवन की कहानी बयां कर रही हो। यह दृश्य ईरान के दक्षिणी शहर मीनाब का है, जहां एक स्कूल पर हुए हमले के बाद सामूहिक अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है।
हमले का विवरण
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें ताज़ा खोदी गई कब्रों की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। उनके अनुसार, ये कब्रें उन 160 से अधिक छात्राओं के लिए तैयार की जा रही हैं, जो एक प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले में मारी गईं। उन्होंने यह भी कहा कि यह हमला अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई का हिस्सा था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
ईरानी अधिकारियों का कहना है कि हमले के समय स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चियां मौजूद थीं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 150 से अधिक लोगों की मौत हुई है, जिनमें अधिकतर छात्राएं थीं, जबकि लगभग 60 लोग घायल बताए गए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
मलबे में बिखरी यादें
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आए कुछ वीडियो में बचावकर्मियों को मलबा हटाते हुए देखा गया है। टूटी दीवारें, बिखरे स्कूल बैग और धूल से ढकी किताबें इस त्रासदी की गंभीरता को दर्शाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हमले के बाद इलाके में मातम का माहौल है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का दृष्टिकोण
ईरान ने इस घटना को नागरिक ढांचे पर सीधा हमला बताया है और इसे संयुक्त राष्ट्र में युद्ध अपराध तथा मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है। अमेरिका और इजरायल ने इस हमले को जानबूझकर नहीं किया है, ऐसा सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने कहा है कि उसे नागरिक हताहतों की खबरों की जानकारी है और मामले की समीक्षा की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार, किसी भी सशस्त्र संघर्ष में नागरिकों और सैन्य ठिकानों के बीच स्पष्ट अंतर करना आवश्यक है। स्कूल, अस्पताल और अन्य नागरिक ढांचे संरक्षित माने जाते हैं और इन्हें सीधे निशाना नहीं बनाया जा सकता। बच्चों को विशेष सुरक्षा का अधिकार प्राप्त है।
हालांकि, यदि किसी नागरिक भवन का उपयोग सैन्य उद्देश्य के लिए किया जाए, तो उसका संरक्षित दर्जा समाप्त हो सकता है। फिलहाल ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह साबित हो कि मीनाब के स्कूल का इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।