ईरान युद्ध में अमेरिका का खर्च: क्या बढ़ेगा राजनीतिक दबाव?
अमेरिका के लिए ईरान युद्ध का आर्थिक बोझ
नई दिल्ली: ईरान के खिलाफ चल रहे संघर्ष ने अमेरिका के लिए वित्तीय चुनौतियों को बढ़ा दिया है। सैन्य खर्च और सैनिकों की हताहति ने सरकार पर दबाव डाला है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने सीनेट की सुनवाई में बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका अब तक 37.5 अरब डॉलर (लगभग 3.61 लाख करोड़ रुपये) खर्च कर चुका है। इस जानकारी के बाद युद्ध की लागत और सरकारी रणनीति पर नई बहस छिड़ गई है।
युद्ध के खर्च में वृद्धि पर चिंता
सुनवाई के दौरान, पीट हेगसेथ ने कहा कि युद्ध लगातार संसाधनों की मांग कर रहा है और सेना को अभियान जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की आवश्यकता है। उनके अनुसार, मौजूदा खर्च पहले के अनुमानों से कहीं अधिक हो चुका है और भविष्य में भी इसमें वृद्धि की संभावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहायता आवश्यक है। यदि समय पर फंडिंग नहीं मिली, तो सेना को कई महत्वपूर्ण अभियानों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी सैनिकों को भी हो रहा नुकसान
युद्ध का प्रभाव केवल आर्थिक मोर्चे तक सीमित नहीं है। पेंटागन के अनुसार हालिया हमलों में तीन और अमेरिकी सैनिकों की जान गई है। जुलाई की शुरुआत से अब तक कुल 17 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 100 से अधिक घायल हुए हैं। इससे अमेरिका में युद्ध को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
सीनेट में सरकार पर विपक्ष का हमला
सीनेट की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्री को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेट सांसदों ने सरकार की युद्ध नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अमेरिका एक बार फिर ऐसे संघर्ष में फंसता जा रहा है, जिसका कोई अंत नहीं दिखाई दे रहा।
डेमोक्रेट सदस्य पैटी मरे ने कहा कि सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि समझौता जल्द होगा, लेकिन दूसरी ओर युद्ध के लिए और अधिक धन की मांग की जा रही है। उन्होंने इसे "एक और कभी न खत्म होने वाली जंग" करार दिया।
व्हाइट हाउस ने मांगी अतिरिक्त फंडिंग
रिपब्लिकन पार्टी ने रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े बड़े बजट प्रस्ताव का समर्थन किया है। इस प्रस्ताव में युद्ध संचालन, सुरक्षा व्यवस्था, कृषि सहायता और अन्य योजनाओं के लिए अतिरिक्त राशि का प्रावधान रखा गया है। व्हाइट हाउस ने भी सीनेट से अपील की है कि इस बजट प्रस्ताव को बिना किसी बदलाव के जल्द मंजूरी दी जाए, ताकि सेना के अभियान प्रभावित न हों।
राजनीतिक दबाव में वृद्धि की संभावना
सैन्य खर्च में वृद्धि, सैनिकों की हताहति और विपक्ष के हमलों के बीच ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका असर अमेरिका की अर्थव्यवस्था, रक्षा बजट और घरेलू राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।