ईरान समर्थित मिलिशिया का इराक में सऊदी पाइपलाइन पर हमला, स्थिति गंभीर
सऊदी अरब की पाइपलाइन पर हमला
ईरान के समर्थन वाली मिलिशिया ने इराक में सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण पाइपलाइन पर हमला कर उसे बंद कर दिया। इस घटना के बाद, इराकी सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। इराक ने इस हमले की पुष्टि की है और जांच का आश्वासन दिया है, साथ ही एक सैन्य कमांडर को भी हटा दिया गया है। इराक पर यह दबाव बढ़ रहा है कि वह स्थानीय मिलिशिया को ईरान समर्थित अन्य समूहों की सहायता करने से रोके।
हूती विद्रोहियों की गतिविधियाँ
यह दबाव तब और बढ़ गया है जब ईरान समर्थित हूती विद्रोही यमन के पश्चिमी तट पर आगे बढ़ रहे हैं। इससे सऊदी समर्थित गठबंधन को बड़ा झटका लगा है और क्षेत्र में युद्ध की संभावना बढ़ गई है। इराक सरकार ने गैर-सरकारी समूहों के लिए हथियार छोड़ने की समयसीमा 30 सितंबर निर्धारित की है, लेकिन कई शक्तिशाली मिलिशिया समूहों ने इसका पालन करने से इनकार कर दिया है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर कब्जा
हूती विद्रोहियों ने हाल ही में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जो एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। इस जलडमरूमध्य पर हूतियों का नियंत्रण वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है।
तेल की कीमतों में वृद्धि
ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले से ही तेल की कीमतें बढ़ी हुई हैं। ईरान के साथ युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन बाधित होने के कारण यह मार्ग सऊदी तेल के लिए महत्वपूर्ण बन गया है। इराकी अधिकारियों ने बताया कि सऊदी पाइपलाइन पर हमले ईरान की सीमा से लगे मैसान प्रांत से किए गए थे।
सरकार की प्रतिक्रिया
इराकी सरकार ने शनिवार को एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री अली अल-जैदी ने प्रांत के संचालन कमान के खिलाफ जांच का आदेश दिया है। सऊदी अरब ने शुक्रवार को अपनी प्रमुख तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया था, यह कदम ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया।
यमन में गृहयुद्ध की स्थिति
ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया कि अगली सूचना तक यात्री और व्यावसायिक यातायात रोक दिया गया है। यमन में गृहयुद्ध फिर से भड़कने की आशंका है, जहां 2022 से स्थिति काफी हद तक स्थिर थी। यमन में लगभग चार करोड़ लोगों का भविष्य दांव पर है।
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी ने कहा कि पिछले एक सप्ताह में लड़ाई बढ़ने के कारण 46,000 से अधिक लोग अपने घरों से भाग चुके हैं। हूती विद्रोही 2014 से यमन सरकार के खिलाफ युद्ध कर रहे हैं, जब उन्होंने उत्तरी और मध्य यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था।