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ईरानी ड्रोन हमले का सच: अमेरिका और सऊदी अरब की चुप्पी का पर्दाफाश

रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी ड्रोन हमले का सच अब सामने आ चुका है। एक अमेरिकी सीनेटर ने इस हमले की गंभीरता को उजागर किया, जिससे सऊदी अरब और अमेरिका की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं। हमले के बाद सऊदी सरकार ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। इस घटना ने पश्चिम एशिया में एक नया सैन्य समीकरण बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए तीन देशों के बीच सहयोग को भी जन्म दिया है। जानें इस हमले की पूरी कहानी और इसके पीछे के कारण।
 

रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले का खुलासा

सऊदी अरब और अमेरिका ने जिस सच को छुपाने की कोशिश की, वह अब सामने आ चुका है। एक प्रमुख अमेरिकी सीनेटर ने रियाद में खड़े होकर उस हमले का खुलासा किया, जिसने वाशिंगटन और रियाद में हड़कंप मचा दिया। ईरानी ड्रोन द्वारा अमेरिकी दूतावास पर किए गए हमले की गंभीरता को पहले सऊदी अरब ने कम करके आंका था, लेकिन जब सीनेटर क्रिस मर्फी ने现场 जाकर स्थिति का आकलन किया, तो उन्होंने पाया कि स्थिति बेहद गंभीर थी।


सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने शुरुआत में कहा था कि हमले से केवल मामूली आग लगी है, लेकिन सीनेटर मर्फी ने दूतावास के मलबे को देखकर स्पष्ट किया कि ईरान के दो ड्रोन ने दूतावास को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है।


हालांकि इस हमले को मीडिया से छुपाने की कोशिश की गई, लेकिन नुकसान बहुत अधिक था। मर्फी ने बताया कि यह हमला आधी रात को हुआ, और अगर यह दिन के समय होता, तो कई अमेरिकी राजनयिकों की जान जा सकती थी। यह एक बड़े नरसंहार में बदल सकता था।


सीनेटर ने आरोप लगाया कि ट्रंप प्रशासन जानबूझकर हमले में घायल अमेरिकी कर्मियों की सही संख्या को छुपा रहा है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक में ट्रंप प्रशासन की विफलताओं को उजागर किया।


सऊदी अरब में मौजूद लोग इस हमले की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद सऊदी सरकार ने ऐसे वीडियो पोस्ट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया।


पश्चिम एशिया में बढ़ते विद्रोहियों के हमलों के बीच, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने मिलकर एक नया सैन्य समीकरण बनाने का निर्णय लिया है। हाल ही में हुई एक इमरजेंसी बैठक में तीनों देशों के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए और विद्रोहियों के हमलों की कड़ी निंदा की।