ईरानी युद्धपोत IRIS डेना के डूबने की घटना में नया खुलासा
श्रीलंका के जल क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को डुबोने की घटना में नए खुलासे हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में मारे गए नाविक ने अपने पिता को बताया कि क्रू को दो बार चेतावनी दी गई थी, जो ईरान के आधिकारिक दावे को चुनौती देती है। इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ा दिया है, और भारतीय रक्षा विशेषज्ञ भी इस पर नजर रख रहे हैं। जानें इस घटना के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
Mar 8, 2026, 16:51 IST
अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत का डूबना
हाल ही में श्रीलंका के जल क्षेत्र में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत IRIS डेना को डुबोने के मामले में एक नई जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, हमले में मारे गए एक नाविक ने अपने पिता को फोन पर बताया कि अमेरिकी सेना ने क्रू को जहाज छोड़ने के लिए दो बार चेतावनी दी थी। यह जानकारी ईरान के उस आधिकारिक बयान को चुनौती देती है, जिसमें कहा गया था कि हमला बिना किसी चेतावनी के किया गया था।
कमांडर और क्रू के बीच विवाद
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि चेतावनी मिलने के बाद युद्धपोत के कमांडर और क्रू के सदस्यों के बीच बहस हुई। नाविक जहाज छोड़ने के इच्छुक थे, लेकिन कमांडर ने उन्हें ऐसा करने की अनुमति नहीं दी। इस हमले में अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो का उपयोग किया, जिससे कई नाविकों की जान चली गई। श्रीलंका की नौसेना ने बचाव कार्य करते हुए 87 शव बरामद किए और 32 लोगों को सुरक्षित निकाला।
दूसरे विश्व युद्ध के बाद की महत्वपूर्ण घटना
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले को एक शांत मौत बताया है। उन्होंने कहा कि यह दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन के युद्धपोत को डुबोने के लिए पनडुब्बी का सहारा लिया है। इस घटना ने अमेरिका और ईरान के बीच के तनाव को एक नए और गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है।
भारत के लिए महत्व
यह ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारत के विशाखापत्तनम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय नौसेना अभ्यास मिलन 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल हुआ था। इस कारण भारतीय रक्षा विशेषज्ञ इस घटना पर ध्यान दे रहे हैं।
बचे हुए नाविकों की स्थिति
इस बीच, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका ने श्रीलंका सरकार से संपर्क किया है। अमेरिका ने श्रीलंका से अनुरोध किया है कि वह बचाए गए 32 नाविकों और एक अन्य ईरानी जहाज IRIS बूशहर के 208 नाविकों को फिलहाल ईरान वापस न भेजे।