ईरानी युद्धपोत पर अमेरिकी हमले के बाद 22 नाविकों को मिली राहत, जानें पूरी कहानी
नई दिल्ली से राहत की खबर
नई दिल्ली : श्रीलंका के दक्षिणी तट पर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किए गए टॉरपीडो हमले में डूबे ईरानी युद्धपोत 'आईरिस डेना' के बचे हुए नाविकों के लिए राहत की एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। रविवार को अस्पताल प्रशासन ने पुष्टि की कि 22 ईरानी नाविकों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इन नाविकों को कड़ी सुरक्षा के बीच एम्बुलेंस से गॉल के कोगाला स्थित श्रीलंकाई वायु सेना केंद्र में भेजा गया है।
हमला श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र में हुआ
यह गंभीर घटना पिछले बुधवार को श्रीलंका के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में घटित हुई। ईरान का आधुनिक युद्धपोत 'आईरिस डेना' विशाखापत्तनम में एक बड़े नौसैनिक अभ्यास के बाद अपने देश लौट रहा था, तभी गॉल के तट के निकट एक अमेरिकी पनडुब्बी ने इसे टॉरपीडो से निशाना बनाया। इस हमले के परिणामस्वरूप यह शक्तिशाली युद्धपोत समुद्र में समा गया। श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक 84 मृत नाविकों के शवों की बरामदगी की पुष्टि की है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री तनाव की स्थिति
गॉल के दक्षिणी शहर में 5 मार्च को सभी 84 शवों की मजिस्ट्रेट जांच और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई। जीवित बचे नाविकों ने अपने दिवंगत साथियों की पहचान में प्रशासन की सहायता की है। उन्होंने बरामद किए गए 84 कर्मियों में से 80 की सफलतापूर्वक पहचान की है। विशाखापत्तनम से शुरू हुआ उनका सफर एक भयानक त्रासदी में बदल गया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों में भारी तनाव उत्पन्न किया है।
स्वदेश वापसी में चुनौतियाँ
श्रीलंकाई सरकार ने शनिवार को बताया कि इन शवों को सम्मानजनक तरीके से स्वदेश भेजने के लिए सभी आवश्यक कूटनीतिक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति इतनी बेहतर नहीं है कि उन्हें हवाई या समुद्री मार्ग से भेजा जा सके। जोखिमों को देखते हुए फिलहाल उनकी रवानगी रुकी हुई है। जब तक हालात पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आते, तब तक इन शवों को गॉल में विशेष सुरक्षा में रखा जाएगा।
आईरिस बुशहर के नाविकों की स्थिति
इस घटनाक्रम में शामिल दूसरे ईरानी जहाज 'आईरिस बुशहर' के नाविकों की स्थिति भी चर्चा का विषय बनी हुई है। वे वर्तमान में कोलंबो के बाहरी इलाके वेलिसारा नौसैनिक सुविधा केंद्र में कड़ी निगरानी में हैं। श्रीलंका सरकार ने अभी तक उनके देश वापस भेजे जाने के संबंध में कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है। विदेश मंत्री विजीता हेराथ ने स्पष्ट किया कि श्रीलंका इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित वैश्विक संधियों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करेगा।
22 नाविकों को सुरक्षा घेरे में भेजा गया
अस्पताल से छुट्टी पाने के बाद 22 नाविकों को कोगाला एयर फोर्स बेस ले जाने के दौरान अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। श्रीलंकाई सुरक्षा एजेंसियां किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहती हैं, क्योंकि यह मामला दो महाशक्तियों के बीच बढ़ते तनाव से जुड़ा है। नाविकों के स्वास्थ्य और उनके कूटनीतिक भविष्य पर चर्चा जारी है। करापिटिया अस्पताल में भर्ती अन्य 10 घायल नाविकों की स्थिति पर डॉक्टरों की विशेष टीम नजर बनाए हुए है।