ईरानी राष्ट्रपति की मॉस्को यात्रा: पुतिन और अमेरिका के बीच संभावित डील के संकेत
मॉस्को में ईरानी राष्ट्रपति का स्वागत
मॉस्को में ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान का भव्य स्वागत कई महत्वपूर्ण संकेत प्रस्तुत करता है। यह सभी जानते हैं कि रूस और ईरान के बीच लंबे समय से मित्रता का रिश्ता है, जो राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी मुलाकात में भी स्पष्ट दिखाई देता है। हालांकि, पेजेश्कियान की इस यात्रा को लेकर कई अटकलें भी लगाई जा रही हैं। क्या पुतिन अमेरिका के साथ ईरान के संबंधों में सुधार लाने में मदद कर पाएंगे? यह सवाल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के प्रयास चल रहे हैं।
युद्ध का खतरा और ईरान के प्रतिबंध
क्या इस यात्रा से युद्ध का खतरा कम होगा और ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिलेगी? पुतिन ने इस दौरान ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनई को याद करते हुए भावुकता दिखाई। अमेरिका और इजराइल द्वारा खामनई की हत्या के बाद रूस ने इसकी कड़ी निंदा की थी। इसके बाद जब युद्ध शुरू हुआ, तो कई रिपोर्टों में कहा गया कि रूस ने ईरान को महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए अपने खुफिया सेटेलाइट का उपयोग किया।
रूस का परमाणु सहयोग
रूस ने ईरान के लिए अपने परमाणु वैज्ञानिकों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। रूस 800 नए वैज्ञानिकों की भर्ती करेगा, जो ईरान में आठ न्यूक्लियर प्लांट स्थापित करेंगे। ईरान के पास 440 किलो यूरेनियम 60% संवर्धित है, और जब यह 90% तक पहुंचता है, तो यह परमाणु बम बनाने में सक्षम होता है। रूस की परमाणु तकनीक में विशेषज्ञता और उसके पास मौजूद बमों की संख्या अमेरिका और इजराइल के लिए चिंता का विषय है।
ईरान की प्रतिक्रिया
पेजेश्कियान ने मॉस्को दौरे से पहले स्पष्ट किया था कि ईरान अपना एक ग्राम भी संवर्धित यूरेनियम किसी को नहीं देगा। इसके अलावा, ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने ईरान के यूरेनियम पर हमला किया, तो वे ऐसा बम इस्तेमाल करेंगे जिसे दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा।
अमेरिका और इजराइल की योजनाएं
ईरानी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ऊर्जा और परमाणु स्थलों पर हमले की योजना बनाई है। इसके लिए उन्होंने गुप्त सर्वेक्षण किया है, जिसमें संदिग्ध परमाणु ठिकानों का भी उल्लेख है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने संवर्धित यूरेनियम और अन्य हथियारों को पहाड़ों में छिपा रखा है।