उत्तर कोरिया की नौसेना को मजबूत करने की योजना: किम जोंग उन का बड़ा ऐलान
उत्तर कोरिया की सैन्य ताकत में वृद्धि
उत्तर कोरिया एक बार फिर अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर चर्चा में है। देश के नेता किम जोंग उन ने नौसेना को और अधिक शक्तिशाली बनाने के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि अगले पांच वर्षों में चोए ह्योन जैसे दो और युद्धपोत तैयार किए जाएंगे। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की योजना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।
चोए ह्योन का औपचारिक शामिल होना
किम जोंग उन ने यह घोषणा पश्चिमी तटीय शहर नाम्पो में आयोजित एक समारोह में की। इसी अवसर पर उत्तर कोरिया के सबसे बड़े युद्धपोत चोए ह्योन को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया। यह युद्धपोत लगभग 5,000 टन क्षमता का है और पिछले 14 महीनों से सैन्य परीक्षणों में था।
पिछले वर्ष के युद्धपोतों का जिक्र
गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने पिछले वर्ष अप्रैल में इसी श्रेणी के दो युद्धपोतों को लॉन्च किया था, जिनमें से एक चोए ह्योन और दूसरा कांग कोन है। कांग कोन के जलावतरण के समय तकनीकी समस्या के कारण वह आंशिक रूप से पलट गया था, लेकिन अब उसे भी जल्द नौसेना में शामिल करने के संकेत दिए गए हैं।
नौसैनिक क्षमता में वृद्धि
समारोह में किम जोंग उन ने कहा कि उत्तर कोरिया की नौसैनिक क्षमता अब ऐसी होगी जिसकी कल्पना करना भी कठिन है। उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक नौसैनिक अड्डों का निर्माण देश की तत्काल आवश्यकता बन चुका है। किम के अनुसार, उत्तर कोरिया केवल अपने तटीय क्षेत्रों की रक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि उसे एक रणनीतिक सैन्य शक्ति में बदलने की दिशा में काम कर रहा है।
चोए ह्योन की सुरक्षा जिम्मेदारी
जानकारी के अनुसार, चोए ह्योन युद्धपोत को उत्तर कोरिया के पश्चिमी समुद्री तट की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्टों में कहा गया है कि इस युद्धपोत में हवाई हमलों से रक्षा करने वाली प्रणालियां, समुद्री लक्ष्यों को निशाना बनाने वाले हथियार और परमाणु क्षमता वाली बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें शामिल हैं।
परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का विस्तार
उत्तर कोरिया पिछले कई वर्षों से अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद, प्योंगयांग अपनी सैन्य परियोजनाओं को आगे बढ़ाता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने समुद्री सैन्य शक्ति को अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना लिया है।
सुरक्षा को लेकर चिंताएं
इसी बीच, सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की तीन दिवसीय बैठक में किम जोंग उन ने राष्ट्रीय रक्षा क्षमता को तेजी से बढ़ाने की नीति को दोहराया। उन्होंने अमेरिका और दक्षिण कोरिया पर क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को बढ़ाने का आरोप लगाया। किम का कहना है कि दोनों देशों द्वारा हथियारों के आधुनिकीकरण और सैन्य सहयोग में वृद्धि से कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव बढ़ रहा है।
परमाणु प्रतिरोधक क्षमता का महत्व
उत्तर कोरियाई नेतृत्व का मानना है कि ऐसी परिस्थितियों में देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना आवश्यक है। पार्टी के अधिकारियों ने भी परमाणु बलों के विस्तार को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका बताया है। ऐसे में उत्तर कोरिया के नए सैन्य कदमों पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।