एलन मस्क की जासूसी: चीन की महिला कमांडर का खुलासा
बीजिंग में एलन मस्क के भोज के दौरान एक महिला वेटर की पहचान एक जासूस के रूप में हुई है। यह महिला, जो PLA की कमांडर है, मस्क की जासूसी कर रही थी। जेनिफर जेंग ने इस खुलासे को साझा किया है, जिसमें बताया गया है कि चेंग चेंग ने ट्रंप के दौरे के दौरान भी जासूसी की थी। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है और चीन की मंशा पर क्या सवाल उठ रहे हैं।
May 25, 2026, 13:22 IST
बीजिंग में राजकीय भोज का रहस्य
14 मई 2026 को बीजिंग में आयोजित एक राजकीय भोज में, दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क ने अजीबोगरीब चेहरे बनाए। कभी हंसते हुए, तो कभी अजीब रिएक्शन देते हुए, उनका यह वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में एक महत्वपूर्ण बात यह थी कि लाल कपड़ों में एक महिला वेटर, जिसे चीन ने मस्क की सेवा के लिए नियुक्त किया था, वास्तव में एक जासूस निकली। यह महिला, जो वेटर के रूप में काम कर रही थी, असल में पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की कमांडर है। मस्क की जासूसी करने का आरोप लगाया जा रहा है।
जासूस का खुलासा
इस महिला के बारे में जानकारी देने वाली कोई और नहीं, बल्कि चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ता जेनिफर जेंग हैं। जेंग ने इस महिला का वीडियो साझा करते हुए बताया कि वह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्य और PLA की बटालियन कमांडर है। उनका नाम चेंग चेंग है, जिसने ट्रंप के बीजिंग दौरे के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की जासूसी की थी। जेंग का दावा है कि चीन ने अमेरिकी अधिकारियों पर नजर रखने के लिए इस महिला को तैनात किया था।
चेंग चेंग का सैन्य करियर
जेनिफर जेंग ने चेंग चेंग का एक वीडियो भी साझा किया है, जिसमें वह सेना की वर्दी में सम्मानित होती नजर आ रही हैं। चेंग का जन्म दिसंबर 1986 में शडोंग प्रांत के वेईफांग में हुआ था। 2004 में, जब वह 18 साल की थीं, उन्होंने चीनी सेना में शामिल होने का निर्णय लिया। उन्होंने शुरुआत में कम्युनिकेशन सोल्जर के रूप में कार्य किया और बाद में नर्सिंग की पढ़ाई की। चेंग ने कई महत्वपूर्ण समारोहों में भाग लिया है और 2018 में वह दो बार नेशनल पीपल्स कांग्रेस की सदस्य भी चुनी गईं।
चीन की मंशा पर सवाल
यह स्पष्ट है कि चीन ने एलन मस्क की जासूसी के लिए एक कुशल और प्रशिक्षित महिला कमांडर को नियुक्त किया था। डिनर हॉल में वह वेटर के रूप में मौजूद थी ताकि किसी को उन पर संदेह न हो। हालांकि, चीन ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 15 मई को, जब अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ट्रंप के साथ लौट रहा था, उन्होंने चीन से मिले सभी उपहार और सामान को विमान में चढ़ने से पहले ही फेंक दिया। यह कदम साइबर जासूसी के डर के कारण उठाया गया था।