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एशिया में मौसम का अभूतपूर्व बदलाव: 180% अधिक बारिश का रिकॉर्ड

एशिया में एक विशाल मौसम प्रणाली ने अभूतपूर्व बारिश का रिकॉर्ड बनाया है, जिसमें पिछले दो दिनों में सामान्य से 180% अधिक वर्षा हुई है। यह स्थिति भारत के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक बारिश का कारण बनी है। मौसम विभाग ने इसे इस साल का सबसे बड़ा मानसून डे बताया है, जिससे कृषि को लाभ होगा। हालांकि, पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ गया है। जानें इस मौसम परिवर्तन के प्रभाव और कृषि पर इसके लाभ के बारे में।
 

विशाल मौसम प्रणाली का प्रभाव


नई दिल्ली: एशिया के वायुमंडल में एक विशाल और अद्वितीय मौसम प्रणाली का अवलोकन किया गया है। हालिया उपग्रह चित्रों में उत्तर भारत, हिमालयी क्षेत्र और चीन से लेकर दक्षिण कोरिया तक फैली 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी बादलों की एक पट्टी दिखाई दे रही है। मौसम विज्ञानियों ने इसे मौजूदा दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन का सबसे सक्रिय और उग्र चरण बताया है। हिंद महासागर से उठने वाली नमी से भरी हवाएं जब मध्य और पूर्वी एशियाई मौसम प्रणालियों से मिलीं, तो महाद्वीप के ऊपर बारिश का एक निरंतर गलियारा बन गया।


असामान्य बारिश का रिकॉर्ड

दो दिनों में सामान्य से 180% ज्यादा वर्षा


पिछले दो दिनों में सामान्य से 180% अधिक वर्षा हुई है। इस मानसूनी चक्र का सीधा प्रभाव भारत के मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक बारिश के रूप में देखा जा रहा है। पिछले 48 घंटों में देश में औसतन 170 से 180 प्रतिशत तक दैनिक बारिश दर्ज की गई है, जो इस पूरे सीजन का सबसे बड़ा आंकड़ा है। मौसम विशेषज्ञों ने इसे इस वर्ष का सबसे बड़ा मानसून डे करार दिया है। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों में घने मानसूनी बादलों की मोटी परत देश के मध्य, उत्तरी और पूर्वी हिस्सों पर छाई हुई है। हवा के कम दबाव वाले क्षेत्र के लंबे समय तक एक ही स्थान पर बने रहने के कारण नमी से भरी हवाएं तेजी से ऊपर उठकर घने बादलों में बदल गई हैं और पूरे क्षेत्र में बारिश कर रही हैं।


कृषि के लिए फायदेमंद

कृषि के लिए संजीवनी


मौसम विभाग के अनुसार, यह सक्रिय मौसम चक्र इस पूरे हफ्ते बना रहेगा। इससे देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में जलस्तर तेजी से बढ़ेगा, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और वृद्धि को महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा। यह घटना यह दर्शाती है कि भारतीय मानसून केवल एक क्षेत्रीय मौसमी परिवर्तन नहीं है, बल्कि पूरे एशियाई महाद्वीप के पर्यावरण को प्रभावित करने वाला एक बड़ा चक्र है।


भूस्खलन का खतरा

पहाड़ों पर भूस्खलन की चेतावनी


पहाड़ों में भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है। शुरुआती हफ्तों में बारिश की कमी झेल रहे राज्यों के लिए यह मौसमी दौर बड़ी राहत लेकर आया है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में लगातार बारिश हो रही है। वहीं, बंगाल की खाड़ी से उठे कम दबाव के क्षेत्र के कारण पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी तेज बौछारें पड़ रही हैं। इस भारी बारिश ने पहाड़ी क्षेत्रों में चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में नदियों में उफान और जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है। निचले इलाकों में जलभराव और अचानक बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।