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ओमान में तेल टैंकर पर हमले के बाद भारत ने अमेरिका से जताया विरोध

भारत ने ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर हुए हमले के बाद अमेरिका के वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया है। इस घटना में जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, जहाज पर 28 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें से 24 भारतीय थे। अब तक 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि तीन लापता हैं। अमेरिका ने इस हमले की पुष्टि की है, और भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
 

भारत का कड़ा रुख


नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ओमान के तट पर एक तेल टैंकर पर हुए हमले के संदर्भ में भारत ने सख्त कदम उठाया है। इस घटना में जहाज पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए, भारत सरकार ने अमेरिका के एक वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया और अपना विरोध दर्ज कराया।


भारतीय चालक दल की स्थिति

विदेश मंत्रालय के अनुसार, "सेटेबेलो" नामक वाणिज्यिक जहाज पर कुल 28 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें से 24 भारतीय थे। इस घटना के बाद से 21 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि तीन भारतीय अब भी लापता हैं। उनकी खोज के लिए बचाव अभियान जारी है।


भारत का दूतावास ओमान की सरकार और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर स्थिति पर नजर रख रहा है। लापता भारतीयों की खोज के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।


अमेरिका की पुष्टि

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि उसने 9 जून की रात इस जहाज को निशाना बनाया था। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जहाज को कई बार निर्देश दिए गए थे, लेकिन चालक दल द्वारा पालन नहीं किए जाने के कारण उसके इंजन रूम पर सटीक हमला किया गया।


हमले के बाद जहाज में आग लग गई और उसने ओमान के सोहार बंदरगाह के उत्तर-पूर्व में संकट संदेश भेजा। इसके बाद ओमानी नौसेना ने राहत और बचाव कार्य शुरू किया।


समुद्री तनाव की स्थिति

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह घटना ईरान से जुड़े समुद्री व्यापार पर अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों के बीच हुई है। हाल के महीनों में खाड़ी क्षेत्र में कई जहाजों को रोका गया है या उन पर कार्रवाई की गई है।


भारत की अपील

भारत ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों पर बढ़ते खतरे चिंताजनक हैं। सरकार ने सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है। भारत का कहना है कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को तेज किया जाना चाहिए।