कतर और स्विट्जरलैंड की मध्यस्थता: अमेरिका-ईरान वार्ता में नई उम्मीदें
मिडिल ईस्ट में संकट के बीच कतर और स्विट्जरलैंड की भूमिका
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, कतर और स्विट्जरलैंड अमेरिका और ईरान के बीच संवाद को पुनः स्थापित करने के लिए प्रयासरत हैं। कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री, शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री इग्नाजियो कैसिस के साथ फोन पर बातचीत की। कतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने तनाव को कम करने और तेहरान तथा वाशिंगटन के बीच चल रही वार्ता में सहायता के लिए कूटनीतिक सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
लेबनान में इजरायली हमलों का असर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च को लड़ाई फिर से शुरू होने के बाद से इजरायली हमलों में 3,433 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। 10,395 से अधिक लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि संघर्ष विराम की कोशिशों के बावजूद हिंसा जारी है, जिससे पूरे देश में मानवीय संकट बढ़ता जा रहा है।
US-ईरान संघर्ष से तेल की कीमतों में वृद्धि
अमेरिका और ईरान के बीच फिर से झड़पों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। नाजुक युद्धविराम को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत में 4.7% की वृद्धि हुई है। इसी बीच, अमेरिकी शेयर बाजार में हल्की गिरावट देखी गई, जहां S&P 500 में 0.1% की कमी आई और डॉव जोन्स 166 अंक गिर गया।
ट्रेजरी यील्ड्स में भी वृद्धि हुई है, जबकि टेक्नोलॉजी स्टॉक्स स्थिर बने रहे। इस दौरान साइंस एप्लीकेशंस इंटरनेशनल कॉर्प के शेयरों में तेजी आई, क्योंकि कंपनी ने उम्मीद से बेहतर तिमाही मुनाफे की रिपोर्ट दी थी।
परमाणु वार्ता में अमेरिका का नरम रुख
ईरान का कहना है कि परमाणु वार्ता में अमेरिका ने अपना रुख नरम किया है। ईरानी वार्ता टीम के सदस्य सईद अजोरलू ने फार्स न्यूज एजेंसी को बताया कि अब वाशिंगटन ईरान की परमाणु सामग्री को विदेश भेजने पर जोर नहीं दे रहा है। अमेरिका का ध्यान अब इन सामग्रियों की स्थिति तय करने पर है।
अजोरलू ने यह भी कहा कि ईरान पहले ही अमेरिका के उन प्रस्तावों को खारिज कर चुका है जिनमें परमाणु भंडार को अमेरिका या किसी तीसरे देश में भेजने की बात थी। नए मसौदे में होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं, जहां कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ जमीन पर संघर्ष और बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है।