कनाडा में अलगाववाद की बहस: अल्बर्टा और खालिस्तान कार्यक्रम की नजदीकी तिथियाँ
कनाडा में अलगाववाद की नई बहस
इस महीने कनाडा में अलगाववाद से संबंधित दो महत्वपूर्ण घटनाएँ एक-दूसरे के करीब आ गई हैं। अल्बर्टा में 19 अक्टूबर को एक प्रांतीय जनमत संग्रह आयोजित किया जाएगा, जिसमें मतदाताओं से पूछा जाएगा कि क्या सरकार को कनाडा से अलग होने के मुद्दे पर भविष्य में बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। यह जनमत संग्रह अल्बर्टा की स्वतंत्रता का तुरंत निर्णय नहीं करेगा, बल्कि यह अलगाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा। इसके ठीक एक दिन पहले, 18 अक्टूबर को एडमंटन में सिख्स फॉर जस्टिस द्वारा खालिस्तान समर्थक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारत से अलग खालिस्तान बनाने के समर्थन में मतदान का दावा किया जा रहा है।
अल्बर्टा के जनमत संग्रह का महत्व
अल्बर्टा का आगामी मतदान सीधे तौर पर यह तय नहीं करेगा कि प्रांत कनाडा से अलग होगा या नहीं। मतदाताओं के सामने यह सवाल होगा कि क्या सरकार को भविष्य में कनाडा से अलग होने के विषय पर बाध्यकारी जनमत संग्रह कराने के लिए आवश्यक संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। यदि अलगाव समर्थक रुख को समर्थन मिलता है, तो भी कई संवैधानिक और राजनीतिक चरण बाकी रहेंगे।
अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा है कि उनकी सरकार एक संयुक्त कनाडा के भीतर अल्बर्टा के अधिकारों और स्वायत्तता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। 19 अक्टूबर के मतदान में आव्रजन, संवैधानिक शक्तियों और प्रांत की आर्थिक स्थिति से जुड़े कई अन्य मुद्दे भी शामिल किए गए हैं।
एडमंटन में खालिस्तान कार्यक्रम
18 अक्टूबर को एडमंटन में सिख्स फॉर जस्टिस द्वारा खालिस्तान से संबंधित एक जनमत संग्रह आयोजित करने की योजना बनाई गई है। संगठन इसे पंजाब की स्वतंत्रता से संबंधित एक अभियान के रूप में प्रस्तुत करता है। हालाँकि, यह मतदान कनाडा सरकार या अल्बर्टा की आधिकारिक चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है।
इसलिए, इन दोनों घटनाओं को एक समान जनमत संग्रह के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अल्बर्टा का मतदान एक आधिकारिक प्रांतीय प्रक्रिया के तहत हो रहा है, जबकि खालिस्तान से जुड़ा कार्यक्रम एक गैर-सरकारी पहल है। फिर भी, इनकी निकटता ने राजनीतिक बहस को नया मोड़ दिया है।
अलगाववाद की राजनीति पर उठते सवाल
अल्बर्टा में अलगाव की बहस की अपनी स्थानीय पृष्ठभूमि है। प्रांत में संघीय सरकार के साथ कर व्यवस्था, संसाधनों, आव्रजन और संवैधानिक अधिकारों को लेकर लंबे समय से मतभेद रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में अलगाव के मुद्दे पर राजनीतिक अभियान को मजबूती मिली है। हालांकि, हाल के सर्वेक्षणों में कनाडा के भीतर बने रहने के पक्ष में स्पष्ट बढ़त दिखाई गई है।
वहीं, खालिस्तान समर्थक अभियान भारत से जुड़े अलग राजनीतिक और क्षेत्रीय विवाद का हिस्सा है। सिख्स फॉर जस्टिस कई देशों में ऐसे मतदान कार्यक्रम आयोजित करने का दावा करता रहा है। भारत इस संगठन और इसके अभियानों को अलगाववादी गतिविधियों से जोड़कर देखता है।
क्या दोनों आंदोलन एक साथ जुड़ते हैं?
दोनों कार्यक्रमों का एक ही क्षेत्र में लगातार दो दिनों पर होना निश्चित रूप से राजनीतिक ध्यान आकर्षित कर रहा है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि दोनों आंदोलन एक ही संगठन या राजनीतिक उद्देश्य से संचालित हैं। अल्बर्टा का मुद्दा कनाडाई संघीय ढांचे और प्रांतीय अधिकारों से संबंधित है, जबकि खालिस्तान अभियान भारत के पंजाब को लेकर अलग राज्य की मांग करता है।
फिलहाल, 18 और 19 अक्टूबर की तारीखें कनाडा में अलगाववाद पर दो अलग-अलग बहसों को एक साथ लाने का कार्य कर रही हैं। एक ओर, अल्बर्टा के मतदाता अपने प्रांत और कनाडा के संवैधानिक रिश्ते पर राय देंगे, जबकि दूसरी ओर, एडमंटन में प्रस्तावित खालिस्तान कार्यक्रम एक गैर-सरकारी अभियान के रूप में ध्यान आकर्षित करेगा। असली राजनीतिक महत्व इस बात का होगा कि इन दोनों घटनाओं के बाद कनाडा में अलगाववाद, प्रांतीय अधिकारों और विदेशी राजनीतिक अभियानों को लेकर बहस किस दिशा में जाती है।