कैम्ब्रिजशायर में हिंदू समुदाय को धार्मिक स्थल नहीं मिला, चर्च और मुस्लिम समूह को मिली मंजूरी
कैम्ब्रिजशायर में धार्मिक स्थल का विवाद
ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में धार्मिक गतिविधियों के लिए निर्धारित भूमि को लेकर चल रही प्रक्रिया का परिणाम सामने आया है, जिससे हिंदू समुदाय को बड़ा झटका लगा है। इस निर्णय में हिंदू समाज की बोली को अस्वीकार कर दिया गया, जबकि स्थानीय चर्च नेटवर्क और मुस्लिम समूह के संयुक्त प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। इस फैसले के बाद, क्षेत्र में रहने वाले हिंदू समुदाय के लोग निराश हैं, क्योंकि उनका कहना है कि पूरे कैम्ब्रिजशायर में उनका कोई मंदिर नहीं है और वे इस भूमि पर मंदिर बनाने की उम्मीद कर रहे थे। इससे 150 हिंदू परिवारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है, क्योंकि उन्हें धार्मिक आयोजनों में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
प्रस्तावों का मूल्यांकन
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थस्टो में नए विकास के लिए धार्मिक संस्थानों के लिए एक भूखंड निर्धारित किया गया था। हिंदू समाज ने इस भूमि के लिए आवेदन किया था, जिसमें मंदिर के साथ एक इंटरफेथ सेंटर बनाने की योजना शामिल थी। दूसरी ओर, नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क ने एक मुस्लिम समूह के साथ मिलकर एक संयुक्त प्रस्ताव पेश किया, जिसमें चर्च और इस्लामी नमाज के लिए स्थान बनाने का सुझाव दिया गया।
हिंदू समुदाय की निराशा
रिपोर्ट के अनुसार, साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने दोनों प्रस्तावों का मूल्यांकन किया। मूल्यांकन के बाद, चर्च नेटवर्क और मुस्लिम समूह के संयुक्त प्रस्ताव को 81 प्रतिशत अंक मिले, जबकि हिंदू समाज के प्रस्ताव को केवल 65 प्रतिशत अंक मिले। इसी आधार पर काउंसिल ने संयुक्त प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिससे हिंदू समाज का आवेदन अस्वीकृत हो गया।
150 परिवारों की समस्या
हिंदू समाज नॉर्थस्टो से जुड़े व्यक्तियों का कहना है कि कैम्ब्रिजशायर में लगभग 150 हिंदू परिवारों के पास पूजा-अर्चना के लिए कोई स्थानीय मंदिर नहीं है। धार्मिक कार्यक्रमों, त्योहारों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए उन्हें अन्य शहरों में जाना पड़ता है। उनका मानना है कि यदि यह भूमि मिल जाती, तो इलाके में पहली बार मंदिर स्थापित किया जा सकता था।
चर्च और मुस्लिम समूह को मिली मंजूरी
रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदू समाज के प्रस्ताव में धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ समुदाय से जुड़े कार्यक्रमों के लिए भी स्थान उपलब्ध कराने की योजना थी। दूसरी ओर, चर्च नेटवर्क और मुस्लिम समूह के प्रस्ताव में दोनों समुदायों के लिए साझा धार्मिक परिसर विकसित करने का सुझाव दिया गया था। परिषद ने अपनी मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद संयुक्त प्रस्ताव को चुना। बताया गया है कि प्रस्तावों का आकलन निर्धारित मानकों के आधार पर किया गया, जिसमें परियोजना की उपयोगिता, समुदाय को मिलने वाला लाभ और अन्य प्रशासनिक पहलुओं को शामिल किया गया।
हिंदू समुदाय की प्रतिक्रिया
फैसले के बाद, हिंदू समाज नॉर्थस्टो के प्रतिनिधियों ने कहा कि उन्हें इस निर्णय से निराशा हुई है। उनका कहना है कि इलाके में हिंदू समुदाय लगातार बढ़ रहा है और लंबे समय से मंदिर के लिए जगह की मांग की जा रही थी। उनका यह भी कहना है कि मंदिर की अनुपस्थिति के कारण धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में कठिनाई होती है। हिंदू समाज से जुड़े लोग इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहे हैं।