क्या अमेरिका-इजरायल के रिश्तों में दरार आ रही है? ट्रंप के बयान ने बढ़ाई चिंता
ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बढ़ते मतभेद
नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के बीच संबंध हमेशा से मजबूत रहे हैं, लेकिन अब दोनों देशों के नेताओं के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से उभरने लगे हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो इजरायल के प्रमुख समर्थकों में से एक माने जाते हैं, ने हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बारे में ऐसी बातें की हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका और इजरायल के संबंध पहले जैसे नहीं रहे।
फ्रांस में आयोजित G-7 सम्मेलन के दौरान, ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में नेतन्याहू के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लेबनान में हाल के सैन्य हमलों से वह संतुष्ट नहीं हैं और यह क्षेत्र में शांति की कोशिशों को नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप ने नेतन्याहू को इस बारे में स्पष्ट संदेश भी दिया और उन्हें 'क्रेजी' तक कह दिया।
ट्रंप का नेतन्याहू को संदेश
बीबी को जिम्मेदारी दिखानी होगी
ट्रंप ने नेतन्याहू को उनके लोकप्रिय उपनाम 'बीबी' से संबोधित करते हुए कहा कि 'मेरे बिना इजरायल का अस्तित्व नहीं होता। बीबी को जिम्मेदार होना पड़ेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने हमेशा इजरायल का समर्थन किया है और उनके कार्यकाल में कई ऐसे निर्णय लिए गए हैं, जिन्होंने इजरायल को मजबूती प्रदान की।
हालांकि, ट्रंप ने यह स्वीकार किया कि उनके और नेतन्याहू के बीच लंबे समय तक अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में दोनों नेताओं की सोच कुछ मुद्दों पर भिन्न दिखाई दे रही है। ट्रंप ने कहा, 'अमेरिका के बिना इजरायल नहीं होता। मेरे बिना इजरायल नहीं होता क्योंकि मेरे अलावा कोई राष्ट्रपति वो नहीं करता जो मैंने किया। बीबी के साथ मेरा रिश्ता शानदार रहा है। अब बीबी को लेबनान को लेकर ज्यादा जिम्मेदार होना पड़ेगा।'
घरेलू राजनीति का प्रभाव
घरेलू राजनीति का भी पड़ रहा असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के भीतर भी युद्ध और विदेश नीति को लेकर बहस तेज हो चुकी है। बढ़ती महंगाई और ईंधन की कीमतों ने आम लोगों की चिंताओं को बढ़ाया है। ऐसे में ट्रंप पर यह दबाव है कि वे किसी बड़े सैन्य संघर्ष से दूरी बनाए रखें और कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दें। यही कारण है कि वे मध्य पूर्व में तनाव कम करने की बात कर रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार एरॉन डेविड मिलर का मानना है कि यदि नेतन्याहू ट्रंप की रणनीति के खिलाफ जाते हैं, तो ट्रंप अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके अनुसार, ट्रंप इस समय क्षेत्रीय संघर्ष को कम करने और किसी बड़े युद्ध से बचने की दिशा में काम करना चाहते हैं। ऐसे में जो भी इस लक्ष्य में बाधा बनेगा, उसे अमेरिकी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका में इजरायल के प्रति बदलता नजरिया
अमेरिका में इजरायल को लेकर बदल रहा नजरिया
अमेरिका में इजरायल के समर्थन को लेकर पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच लगभग समान राय थी, लेकिन अब परिस्थितियां बदलती नजर आ रही हैं। गाजा संघर्ष के बाद कई डेमोक्रेट नेता इजरायल की नीतियों पर सवाल उठा चुके हैं। दूसरी ओर, कुछ रिपब्लिकन नेताओं और समर्थकों के बीच भी यह चर्चा बढ़ रही है कि अमेरिका को किस हद तक इजरायल का समर्थन जारी रखना चाहिए। यही वजह है कि इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद पहले की तुलना में अधिक स्पष्ट हो रहे हैं।
ट्रंप के बयान पर प्रतिक्रियाएं
ट्रंप के बयान पर मिली-जुली प्रतिक्रिया
ट्रंप की टिप्पणियों पर अमेरिका के विभिन्न संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी भिन्न रही हैं। कुछ लोगों ने इसे अनुचित बताया, जबकि कुछ ने इसे दोनों नेताओं के बीच सामान्य राजनीतिक मतभेद माना। कई विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और इजरायल के रिश्ते इतने मजबूत हैं कि किसी एक बयान से उनमें बड़ा बदलाव नहीं आएगा।