क्या अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर ठिकाने पर फिर से हमला करेगा? जानें ताजा स्थिति
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में वृद्धि के बीच एक नई जानकारी सामने आई है, जिसने परमाणु स्थलों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईरान के संदिग्ध भूमिगत न्यूक्लियर साइट 'पिकैक्स माउंटेन' पर निर्माण गतिविधियों में अचानक तेजी आई है। सैटेलाइट चित्रों के विश्लेषण से यह स्पष्ट हुआ है कि क्या अमेरिका इस स्थान पर फिर से हमला कर सकता है।
पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण गतिविधियां
सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के अनुसार, 2026 में पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण कार्य में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह स्थान नतांज परमाणु परिसर के निकट ग्रेनाइट पहाड़ के नीचे स्थित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साइट ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए एक सुरक्षित स्थान के रूप में कार्य कर सकती है। यहां सेंट्रीफ्यूज जोड़ने, यूरेनियम संवर्धन, और अन्य परमाणु गतिविधियों की संभावना जताई जा रही है।
सैटेलाइट चित्रों से पता चलता है कि यहां केवल पहाड़ की खुदाई नहीं हो रही है, बल्कि अंदरूनी हिस्सों में भी निर्माण कार्य चल रहा है। सुरंगों के प्रवेश द्वार को मजबूत किया जा रहा है, सड़कों को बेहतर बनाया जा रहा है, और खुदाई से निकला मलबा हटाया जा रहा है। हालांकि, विश्लेषण के अनुसार, यह साइट अभी यूरेनियम संवर्धन के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं है।
ट्रंप का चेतावनी भरा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह पिकैक्स माउंटेन को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही इस स्थान पर हमला कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि साइट पर हो रही हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
अमेरिकी सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस ठिकाने को निशाना बनाने की योजना पहले से तैयार की जा चुकी थी, जिसमें भारी बमों के उपयोग की बात की गई थी। लेकिन ग्रेनाइट की मजबूत चट्टान के कारण मौजूदा बमों से साइट को पूरी तरह नष्ट करना कठिन माना जा रहा है। इसी कारण अमेरिका नए 'नेक्स्ट जेनरेशन पेनेट्रेटर' बम विकसित कर रहा है, जो गहराई में मौजूद ठिकानों को भेदने में सक्षम होंगे। व्हाइट सैंड्स मिसाइल रेंज में इनसे संबंधित परीक्षण गतिविधियां भी देखी गई हैं।
युद्ध के बीच बढ़ता खतरा
यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष फिर से तेज हो गया है। हाल के दिनों में दोनों पक्षों ने जहाजों और ठिकानों पर हमले किए हैं। इस तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा है, जिससे कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।