क्या अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव से मध्य पूर्व में युद्ध की स्थिति बन रही है?
मध्य पूर्व में तनाव की नई लहर
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में स्थिति एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को लगातार सातवीं रात ईरान के विभिन्न ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि यदि यह कार्रवाई जारी रही, तो उसका प्रतिशोध पहले से कहीं अधिक बड़ा होगा। ईरान के सर्वोच्च नेता के एक प्रमुख सैन्य सलाहकार ने चेतावनी दी है कि ईरान अब केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा और कोई भी राजनीतिक सीमा सुरक्षित नहीं रहेगी।
ईरान की चेतावनी
سیاست هم مذاکره هم جنگ تمام شد؛ اگر آمریکا طی ۲-۳ روز آینده جنگ را ادامه دهد، وارد مرحلهٔ «تهاجم و انهدام کامل» دشمن خواهیم شد. در صورت فعالسازی این راهبرد دیگر به مقابلهبهمثل اکتفا نمیکنیم و هیچ مرز سیاسی در مقابل نیروهای تهاجمی ایران امنیت نخواهد داشت.
— محسن رضایی (@ir_rezaee) July 17, 2026
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने पुष्टि की है कि उसने शुक्रवार रात भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा। यह लगातार सातवीं रात थी जब अमेरिकी बलों ने ईरान के विभिन्न रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। अमेरिका का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और क्षेत्र में बढ़ते खतरे को नियंत्रित करना है।
बड़े हमले की तैयारी
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई के बाद तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के सर्वोच्च नेता के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मेजर जनरल मोहसेन रेज़ाई ने कहा कि यदि अमेरिका अगले दो से तीन दिनों तक हमले जारी रखता है, तो ईरान बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि अब ईरान केवल जवाबी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगा। जरूरत पड़ने पर व्यापक स्तर पर ऐसे कदम उठाए जाएंगे, जिनका असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।
राजनीतिक सीमाओं की सुरक्षा पर सवाल
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरआईबी के अनुसार, मेजर जनरल रेज़ाई ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी राजनीतिक सीमा को पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता। उनके इस बयान को क्षेत्र के देशों के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई इसी तरह जारी रहती है, तो इसका असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
अमेरिकी सहयोगियों पर हमले
हाल के दिनों में तेहरान और वॉशिंगटन के बीच शांति वार्ता सफल नहीं हो सकी। इसके बाद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ीं। इसी दौरान ईरान की ओर से कतर, कुवैत और जॉर्डन जैसे अमेरिकी सहयोगी देशों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। इन घटनाओं के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज कर दिया। अब दोनों देशों के बीच तनाव लगातार नए स्तर पर पहुंचता दिखाई दे रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति
रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित एक निगरानी टावर को नुकसान पहुंचने के बाद ईरान ने फारस की खाड़ी के महत्वपूर्ण बंदरगाहों को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है। यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य संघर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल आपूर्ति पर बड़ा असर डाल सकता है।
दक्षिणी ईरान में बुनियादी ढांचे को नुकसान
लगातार हो रही अमेरिकी बमबारी के दौरान दक्षिणी ईरान के कई पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि इनमें कुछ पुल बंदर अब्बास से जुड़े प्रमुख मार्गों पर स्थित हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के नजदीक होने के कारण रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाते हैं। इन ढांचों को नुकसान पहुंचने से स्थानीय आवाजाही और सैन्य गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।