क्या अमेरिका-ईरान तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ेंगे नए खतरे?
अमेरिका-ईरान तनाव का वैश्विक प्रभाव
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह विश्व के प्रमुख समुद्री ऊर्जा मार्गों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यावधि चुनावों में कमजोर प्रदर्शन के बाद, उनकी सरकार के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाना राजनीतिक दृष्टि से चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ईरान की रणनीति और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण
तेहरान इस स्थिति का लाभ उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण बढ़ाने की योजना बना रहा है। ईरान ने पहले ही संकेत दिया है कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों को उसकी शर्तों का पालन करना होगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं।
नए शुल्क की तैयारी
ईरान द्वारा होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की योजना पर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान इस व्यवस्था को लागू करने के लिए ओमान के साथ समझौते की दिशा में भी आगे बढ़ चुका है। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार मोहसेन रेजाई ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका इस क्षेत्र में कोई अलग समुद्री मार्ग शुरू करने या युद्धपोत भेजने का प्रयास करता है, तो उसे जवाब दिया जाएगा।
टैंकरों की सुरक्षा पर खतरे
होर्मुज क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं उठ रही हैं। हाल की रिपोर्टों में कहा गया है कि तेल टैंकरों के आसपास कई विस्फोट हुए हैं और कुछ जहाज समुद्री बारूदी सुरंगों की चपेट में आए हैं। मंगलवार को तीन टैंकरों में धमाके हुए, लेकिन इन घटनाओं के पीछे की वास्तविक वजह की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है।
ईरान की नई सैन्य रणनीति
ईरान पर आरोप है कि वह समुद्री माइंस, पानी के भीतर चलने वाले ड्रोन और तेज रफ्तार नौकाओं के माध्यम से इस क्षेत्र में दबाव बना रहा है। जहाजों के ट्रांसपॉन्डर बंद करके गुजरने की कोशिश भी जोखिम से मुक्त नहीं मानी जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरानी नौसैनिक इकाइयां कुछ टैंकरों को रोककर उनके मार्ग और नियमों के पालन की जांच कर रही हैं। अमेरिका की ओर से जहाजों को सुरक्षा देने के लिए वैकल्पिक रास्तों की कोशिशों के बावजूद समुद्री कारोबारियों की चिंताएं कम नहीं हुई हैं।
अमेरिकी सैन्य अभियान पर राजनीतिक दबाव
मध्यावधि चुनावों के परिणामों के बाद ट्रंप प्रशासन को घरेलू राजनीति की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ईरान के खिलाफ लंबे सैन्य अभियान को जारी रखने के लिए राजनीतिक समर्थन जुटाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो सकता है। ईरान अपनी वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता को मजबूत करने का दावा कर रहा है। रिपोर्ट में अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को निशाना बनाए जाने और कुछ जासूसी ड्रोन पर कब्जे के दावे भी किए गए हैं।
भारत और अन्य देशों को राहत की संभावना
होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों के लिए प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था में भारत, चीन, इराक और कतर को विशेष रियायतें दिए जाने की संभावना है। रिपोर्ट के अनुसार, इन देशों के जहाजों को प्रतिबंधों से छूट मिल सकती है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो वैश्विक तेल व्यापार पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए कोई कूटनीतिक रास्ता निकलेगा या होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर टकराव और बढ़ेगा।