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क्या अमेरिका-ईरान संघर्ष हिंद महासागर तक पहुंचेगा? जानें ईरान की चेतावनी

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने एक नया मोड़ लिया है, जिसमें ईरान ने हिंद महासागर में युद्ध फैलाने की चेतावनी दी है। इस स्थिति का भारत पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि इसका अधिकांश समुद्री व्यापार इसी महासागर से होता है। जानें इस संघर्ष के संभावित परिणाम और भारत की चिंताएं।
 

नई दिल्ली में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच चुका है। पिछले 7 महीनों से जारी इस संघर्ष को समाप्त करने की उम्मीद कर रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह स्थिति अब चुनौती बन गई है। ईरान ने हिंद महासागर में युद्ध फैलाने की चेतावनी दी है। आइए जानते हैं ईरान ने क्या कहा है।


अमेरिका के हमले का संभावित परिणाम

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के सलाहकार रहीम सफवी ने फार्स न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा कि यह संघर्ष अब फारस की खाड़ी से होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर तक फैल चुका है। यदि अमेरिका ने फिर से बड़ा हमला किया, तो यह लड़ाई हिंद महासागर और उससे भी आगे बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि हिंद महासागर में स्थित अमेरिकी ठिकाने भी ईरान के निशाने पर आ सकते हैं।


यह पहली बार नहीं है जब युद्ध के हिंद महासागर तक पहुंचने की आशंका जताई गई है। संघर्ष की शुरुआत में अमेरिकी नौसेना ने ईरान के एक युद्धपोत को निशाना बनाया था, जिसके बाद से एक ईरानी नौसैनिक जहाज भारत के कोच्चि बंदरगाह पर खड़ा है।


तनाव की चरम स्थिति

वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है। लाल सागर में हूती विद्रोही जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान ने कड़ी पाबंदियां लगा रखी हैं। अमेरिका ने भी होर्मुज के बाहर नाकाबंदी कर रखी है और उसका युद्धपोत अरब सागर में तैनात है। पिछले हफ्ते होर्मुज से केवल 17 जहाज ही गुजर पाए, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।


भारत के लिए चिंताजनक स्थिति

यदि यह संघर्ष हिंद महासागर तक फैलता है, तो भारत के लिए यह एक बड़ी समस्या बन सकती है। भारत का अधिकांश समुद्री व्यापार इसी महासागर के माध्यम से होता है। युद्ध के फैलने से शिपिंग का बीमा महंगा हो जाएगा, कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित होगी और क्षेत्रीय व्यापार को झटका लगेगा। पहले से ही कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारत का आयात बिल बढ़ा हुआ है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का हिंद महासागर तक पहुंचना भारत की अर्थव्यवस्था और विदेश नीति पर दबाव डाल सकता है।