क्या अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़ेगा तनाव? ट्रंप ने दी चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो अमेरिका अपने तरीके से कार्रवाई करने से नहीं चूकेगा। यह बयान उस समय आया है जब ईरान अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियों में लगा हुआ है।
ट्रंप का बयान
व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका हर हाल में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करेगा। उनकी प्राथमिकता समझौते की है, लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिका के लिए अपने उद्देश्यों को पूरा करना कठिन नहीं होगा। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह युद्ध के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं, क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य कदम का प्रभाव करोड़ों लोगों पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यकता पड़ने पर अमेरिका तेजी से बड़े सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाने की क्षमता रखता है।
परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का रुख
ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में ट्रंप ने अपने रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं देगा। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न पहुंचें। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें पहले से नियंत्रित हैं और अमेरिका अपनी रणनीति को लेकर संतुष्ट है।
अमेरिका का मकसद स्पष्ट
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान में सरकार का परिवर्तन नहीं है। उनकी प्राथमिकता केवल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान और परमाणु खतरे को रोकना है। ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि बातचीत के माध्यम से समाधान निकलता है, तो यह सभी पक्षों के लिए बेहतर होगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि हालात बिगड़ते हैं, तो अमेरिका अपने हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
जुबानी टकराव जारी
पिछले महीने हुए अंतरिम शांति समझौते और युद्धविराम के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी टकराव कम नहीं हुआ है। हाल ही में ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ईरानी नेतृत्व एक स्थान पर मौजूद था और अमेरिका चाहें तो सैन्य कार्रवाई कर सकता था, लेकिन बातचीत की संभावना को देखते हुए ऐसा नहीं किया गया। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच अविश्वास और तनाव को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच संबंध सामान्य नहीं हो पाए हैं।
ईरान की प्रतिक्रिया
ट्रंप की टिप्पणियों पर ईरान ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी। आर्मेनिया स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अमेरिका की आलोचना की और कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु से उसके विचार समाप्त नहीं होते। दूतावास ने अपने संदेश में कहा कि आदर्शों और विचारधारा को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने अमेरिका पर सभ्यता, इतिहास और सम्मान की अनदेखी करने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे बयान क्षेत्र में तनाव को और बढ़ाते हैं।