क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से खत्म होगा तनाव? ट्रंप ने दी जानकारी
मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को बताया कि ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है और अमेरिका इस पर सहमत है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच जो सीज़फायर था, वह अब समाप्त हो चुका है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में जहाजों पर हमले और दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया के बाद स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई है।
ईरान की बातचीत की मांग, ट्रंप की सहमति
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ने हमसे 'बातचीत' जारी रखने का अनुरोध किया है। हम इसके लिए सहमत हैं।" लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अमेरिका ने ईरान को स्पष्ट कर दिया है कि सीज़फायर समाप्त हो चुका है।
शांति समझौता क्यों टूटा?
दोनों देशों ने पिछले महीने एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जो तीन महीने से अधिक समय तक चले संघर्ष के बाद हुआ था। लेकिन होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा तीन जहाजों को निशाना बनाने के बाद स्थिति बिगड़ गई। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, जिससे तनाव और बढ़ गया।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संघर्ष
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है, जहां से लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस का गुजरता है। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण होना चाहिए और हर जहाज को शुल्क देना चाहिए, जबकि अमेरिका ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड CENTCOM ने कहा है कि ईरान का होर्मुज़ पर कोई नियंत्रण नहीं है। बयान में बताया गया कि मई से अब तक अमेरिकी सेना ने 800 से अधिक वाणिज्यिक जहाजों और 380 मिलियन बैरल कच्चे तेल की सुरक्षित आवाजाही में मदद की है।
CENTCOM ने यह भी कहा कि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बयान में कहा गया, "अमेरिकी सेना सतर्क और तैयार है।" अब यह देखना होगा कि बातचीत शुरू होने पर क्या सीज़फायर फिर से बहाल हो पाएगा या होर्मुज़ में टकराव और बढ़ेगा।