क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति बन रही है? ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया
ट्रंप और सैन्य अधिकारियों के बीच मतभेद
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके उच्च सैन्य अधिकारियों के बीच ईरान पर संभावित हमले को लेकर मतभेदों की चर्चा अमेरिकी मीडिया में तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, सेना के वरिष्ठ अधिकारी ईरान के खिलाफ किसी बड़े सैन्य अभियान के संभावित खतरों को लेकर चिंतित हैं, जबकि ट्रंप ने इन दावों को पूरी तरह से गलत बताया है। 23 फरवरी को, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर कहा कि यदि युद्ध हुआ, तो अमेरिका आसानी से जीत जाएगा।
ट्रंप का बयान और ईरान के साथ बातचीत
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए सहमत नहीं हैं, जैसा कि मीडिया में बताया गया है। इन विवादास्पद रिपोर्टों ने अमेरिका-ईरान के बीच तनाव को और बढ़ा दिया है, जहां एक ओर सैन्य कार्रवाई की धमकी है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ समझौता करना चाहेंगे, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो ईरान के लिए कठिन दिन आएंगे।
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स
अमेरिकी मीडिया के दावे क्या हैं?
रिपोर्टों में कहा गया है कि जनरल डैन केन ने ईरान पर हमले से जुड़े कई खतरों की चेतावनी दी थी, जिसमें लंबे संघर्ष की संभावना शामिल है। द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जनरल केन ने व्हाइट हाउस और पेंटागन में हथियारों की कमी और सहयोगी देशों के समर्थन की कमी के कारण अमेरिकी सैनिकों को बढ़ते खतरे के बारे में चिंता व्यक्त की थी। द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने अमेरिकी और सहयोगी सैनिकों के हताहत होने और अमेरिका की हवाई रक्षा कमजोर होने के जोखिमों पर चर्चा की थी। एक्सियोस ने बताया कि जनरल केन ने कहा था कि अमेरिका लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में फंस सकता है।
ट्रंप का मीडिया पर आरोप
ट्रंप का मीडिया पर हमला
ट्रंप ने मीडिया पर गलत और जानबूझकर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय वह खुद लेंगे। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जारेड कुशनर ने भी राष्ट्रपति से कहा था कि हमला करने से पहले कूटनीति को एक मौका दिया जाए।
युद्ध की संभावना और तैयारी
युद्ध की संभावना और तैयारी
पिछले साल, ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले का आदेश दिया था और 2018 में अपने पहले कार्यकाल में परमाणु समझौता तोड़ दिया था। अब उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत विफल रही, तो सैन्य कार्रवाई हो सकती है। अमेरिका ने मध्य पूर्व में दो विमानवाहक पोत, कई युद्धपोत, फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य संसाधन तैनात कर दिए हैं।
कूटनीतिक वार्ता अभी भी जारी है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के साथ अगली बैठक गुरुवार को होगी।