क्या अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता खत्म हो गई? जानें ताजा घटनाक्रम
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता जारी है, लेकिन हालात फिर से तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट ईरानी सैन्य ठिकाने पर पिछले 48 घंटों में दूसरा हमला किया है। ईरान ने इसे संघर्षविराम का उल्लंघन करार दिया है और अमेरिका की आलोचना की है।
हमले की पृष्ठभूमि
अमेरिका ने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पर आरोप लगाया है कि उसने पिछले 24 घंटों में मिसाइल, ड्रोन और छोटी नावों से हमले किए। इन हमलों में अमेरिकी जहाजों और विमानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनका जवाबी हमला इन कार्रवाइयों का प्रतिशोध था।
ईरान का दृष्टिकोण इससे भिन्न है। IRGC और ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने सीधे संघर्षविराम का उल्लंघन किया है। उनका दावा है कि ईरानी बलों ने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया और एक F-35 लड़ाकू विमान को खदेड़ दिया।
शांति वार्ता पर प्रभाव
यह घटना उस समय हुई है जब दोनों देश युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत में मीडिया को बताया कि समझौता एक-दो दिनों में हो सकता है। उन्होंने कहा कि केवल एक शब्द या वाक्य के मतभेद बाकी हैं।
युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों से हुई थी। 8 अप्रैल 2026 से अस्थायी संघर्षविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
ट्रंप की नई शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता में दो नई शर्तें जोड़ दी हैं, जिससे बातचीत और जटिल हो गई है। पहली शर्त अब्राहम अकॉर्ड्स से संबंधित है। ट्रंप चाहते हैं कि कतर, सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देश इजरायल के साथ शांति समझौते में शामिल हों। अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे खारिज करते हुए कहा कि सबसे पहले युद्ध रोकना और होर्मुज का रास्ता खोलना आवश्यक है।
दूसरी शर्त यूरेनियम स्टॉक से संबंधित है। ट्रंप ने मांग की है कि ईरान का संवर्धित यूरेनियम या तो अमेरिका को सौंपा जाए या परमाणु ऊर्जा आयोग की निगरानी में नष्ट किया जाए।
खामेनेई का संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया पर अमेरिका को चेतावनी दी है। उन्होंने लिखा कि समय अब पीछे नहीं लौटेगा और क्षेत्र के देश अमेरिकी ठिकानों की सुरक्षा के लिए ढाल नहीं बनेंगे। वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जिससे शांति की उम्मीद पर सवाल उठने लगे हैं।