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क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है? ट्रंप की चेतावनी और महत्वपूर्ण बैठक का खुलासा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो उसे नष्ट कर दिया जाएगा। लेकिन इस धमकी के कुछ घंटों बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसने स्थिति को नया मोड़ दिया। ट्रंप ने बैठक की जानकारी दी, जिसमें वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी शामिल थे। ईरान ने भी अपनी शर्तें रखीं। जानें, इस बैठक का क्या परिणाम निकला और ट्रंप का ईरान के प्रति क्या रुख है।
 

ट्रंप की चेतावनी और बैठक का आश्चर्यजनक मोड़


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ, तो उसे पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाएगा। लेकिन इस धमकी के कुछ घंटों बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय बैठक की खबर ने सबको चौंका दिया, जिसने इस पूरे मामले को नया मोड़ दिया।


संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में ट्रंप ने मंगलवार को इस बैठक की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी अधिकारियों और ईरानी प्रतिनिधियों के बीच यह महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। ट्रंप ने कहा कि विटकॉफ और कुशनर ने ईरान डील पर मध्यस्थों से मुलाकात की और कई चीजें सकारात्मक दिशा में बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली और हाल ही में समाप्त हुई, जिसका परिणाम काफी सकारात्मक रहा।


विटकॉफ के अनुरोध पर आयोजित बैठक

ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, यह बैठक अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ के अनुरोध पर आयोजित की गई थी, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी शामिल हुए। ईरानी मीडिया का दावा है कि इस बैठक के दौरान ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए कुछ सख्त शर्तें रखीं। इन शर्तों में नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत समाप्त करना, ईरान के जमे हुए फंड को तुरंत जारी करना और सभी मोर्चों पर युद्ध को रोकना शामिल था।


ट्रंप का 'समझौता करो या तबाही झेलो' बयान

ट्रंप ने इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए ईरान को चेतावनी दी थी कि उसके पास केवल दो विकल्प हैं। उन्होंने कहा कि ईरान को एक बड़ा निर्णय लेना है, या तो वह एक ऐसा समझौता करे जो उसे एक महान देश के रूप में पुनः स्थापित करे, या फिर अमेरिका उसे तुरंत नष्ट कर दे, ताकि वह भविष्य में किसी अन्य देश या लोगों को नुकसान न पहुंचा सके।


ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर होर्मुज को खोलने वाले समझौते को अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक टालने की कोशिश कर रहा है। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के भाषण के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल के अधिकांश सदस्य विरोध जताते हुए हॉल से बाहर चले गए, लेकिन इसके बावजूद कुछ ही घंटों में दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण बैठक हो गई।