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क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है? तनाव बढ़ने के संकेत

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की बातचीत एक बार फिर मुश्किल दौर में पहुंच गई है। ईरान ने अमेरिका से फ्रीज फंड को रिलीज करने की मांग की है, जबकि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। क्या यह वार्ता सफल होगी या फिर तनाव बढ़ेगा? जानें इस जटिल स्थिति के बारे में पूरी जानकारी।
 

बातचीत में नई बाधाएं


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की बातचीत एक बार फिर कठिनाई में फंस गई है। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान के फ्रीज फंड को विदेशी बैंकों से रिलीज करने के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर मतभेद उभर आए हैं। इस स्थिति ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने के प्रस्तावित समझौते पर अनिश्चितता बढ़ा दी है।


ईरान का स्पष्ट संदेश

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक अमेरिका उसकी कुछ ब्लॉक की गई संपत्तियों को रिलीज करने पर सहमत नहीं होता, तब तक किसी अंतिम समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती। तेहरान का कहना है कि बातचीत के दौरान अमेरिका ने कई बार अपना रुख बदला है, जिससे विश्वास का संकट और गहरा हो गया है।


फ्रीज फंड पर ईरान का सख्त रुख

ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, तेहरान अब केवल अमेरिकी आश्वासनों पर भरोसा नहीं कर रहा है। सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान का मानना है कि पहले बनी सहमतियों के बावजूद अमेरिका ने मुख्य शर्तों पर अड़चनें पैदा की हैं।


तेहरान ने यह संदेश पाकिस्तान और पश्चिम एशिया के उन देशों तक भी पहुंचाया है, जो बैकचैनल कूटनीति में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। ईरान का कहना है कि पुराने अनुभवों को देखते हुए केवल कागजी गारंटी पर्याप्त नहीं होगी और समझौते के तहत उसके फ्रीज फंड को तुरंत रिलीज किया जाना चाहिए।


CNN की रिपोर्ट में भी संशय

अमेरिकी मीडिया, विशेषकर CNN की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच अब तक कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी है। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच मतभेद अभी भी बने हुए हैं।


अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि समझौते के बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन बाद में उन्होंने कहा कि बातचीत अभी पूरी नहीं हुई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान के साथ समझौता तभी होगा जब वह उचित और सही होगा।


यूरेनियम और होर्मुज मुद्दे पर अड़चन

प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार को खत्म करने जैसे मुद्दे शामिल हैं। हालांकि, यूरेनियम डिस्पोजल और भविष्य में परमाणु गतिविधियों पर लगने वाले प्रतिबंधों की अवधि को लेकर अब भी सहमति नहीं बन पाई है।


विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वार्ता विफल होती है, तो इसका प्रभाव पहले से दबाव झेल रहे वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर पड़ सकता है।