क्या अमेरिका और ईरान के बीच होगा ऐतिहासिक शांति समझौता? जानें संभावनाएं
नई दिल्ली में संभावित शांति समझौते की चर्चा
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य टकराव को समाप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता जल्द ही सामने आ सकता है। एक पश्चिमी स्रोत के अनुसार, दोनों देशों के बीच रविवार तक शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इस प्रक्रिया के लिए स्विट्जरलैंड का जिनेवा शहर सबसे उपयुक्त स्थान माना जा रहा है, जहां अंतिम दौर की बातचीत संपन्न हो सकती है।
समझौते के मसौदे पर चल रही बातचीत
सूत्रों के मुताबिक, समझौते के मसौदे पर अभी भी काम जारी है और दोनों पक्ष कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वार्ता में सबसे बड़ी बाधा लेबनान की स्थिति को लेकर है। ईरान चाहता है कि समझौते में लेबनान में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए स्पष्ट प्रावधान शामिल हों। वहां इज़रायल और ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है, जिसे तेहरान क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़कर देखता है।
समझौते की प्रक्रिया और संभावित हस्ताक्षरकर्ता
रिपोर्ट के अनुसार, वार्ताकारों का लक्ष्य शनिवार तक सभी शर्तों को अंतिम रूप देना है ताकि अगले दिन औपचारिक हस्ताक्षर की प्रक्रिया पूरी की जा सके। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ इस समझौते पर हस्ताक्षर करने की संभावना में हैं। हालांकि, आयोजन स्थल की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन जिनेवा का नाम सबसे आगे है।
डोनाल्ड ट्रंप का सकारात्मक संकेत
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने व्हाइट हाउस में पत्रकारों से कहा कि ईरान के साथ युद्ध को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता तैयार हो चुका है, जिसके कारण उन्होंने नए सैन्य हमलों की योजना को आगे नहीं बढ़ाया।
समझौते के संभावित लाभ
हालांकि, समझौते से जुड़ी प्रारंभिक जानकारी से यह संकेत मिलता है कि ईरान की कई प्रमुख मांगों को इसमें शामिल किया जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि तेहरान को समझौते से अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल सकता है, जबकि अमेरिका की प्राथमिक उपलब्धियों में होर्मुज जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना शामिल हो सकता है। ईरान ने इसे फरवरी में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद बंद कर दिया था, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर व्यापक असर पड़ा था।
यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होता है, तो इससे न केवल अमेरिका-ईरान संबंधों में तनाव कम हो सकता है, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में स्थिरता और शांति की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जाएगा।