क्या अमेरिका नाटो से बाहर निकलने वाला है? ट्रंप के बयान से बढ़ी चिंता
ट्रंप का विवादास्पद बयान
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ब्रिटेन के डेली टेलीग्राफ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि वे नाटो से अमेरिका की सदस्यता समाप्त करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने नाटो को 'कागजी शेर' करार दिया और यूरोपीय देशों की निष्क्रियता पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। यह बयान ईरान के साथ संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर सहयोग की कमी के बाद आया है।
ट्रंप का नाटो के प्रति संदेह
ट्रंप ने कहा कि उन्हें नाटो की विश्वसनीयता पर लंबे समय से संदेह है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे ईरान के मुद्दे के बाद अमेरिका की नाटो में सदस्यता पर पुनर्विचार करेंगे, तो उन्होंने कहा, "हां, यह अब पुनर्विचार से भी आगे की बात है।" उन्होंने यह भी कहा, "मैं नाटो से कभी प्रभावित नहीं हुआ। मुझे हमेशा पता था कि यह एक कागजी शेर है और पुतिन भी यह जानते हैं।" ट्रंप ने यूरोपीय देशों की सैन्य क्षमताओं की आलोचना करते हुए कहा कि कई देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं।
नाटो का इतिहास और अमेरिका की भूमिका
उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) की स्थापना 1949 में सोवियत संघ की आक्रामकता से बचाव के लिए की गई थी। अब यह संगठन 77 साल पुराना हो चुका है। अमेरिका इस गठबंधन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण योगदानकर्ता है।
अमेरिका नाटो के बजट में सबसे अधिक धनराशि लगाता है और यूरोप की सुरक्षा में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। अनुच्छेद 5 के तहत एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाता है। यदि अमेरिका नाटो से बाहर निकलता है, तो यह पूरे गठबंधन को कमजोर कर सकता है और यूरोप की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
यूरोप में चिंता का माहौल
ट्रंप के इस बयान ने यूरोपीय देशों में चिंता बढ़ा दी है। कई देशों को डर है कि अमेरिका के बिना नाटो कमजोर हो सकता है। ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई में सहयोग की कमी को इसका मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय सहयोगी होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में भी मदद करने को तैयार नहीं हुए।
ट्रंप का मानना है कि नाटो अब अमेरिका के हितों की रक्षा नहीं कर रहा है, बल्कि अमेरिका यूरोप की रक्षा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अब केवल अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा।
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। यदि अमेरिका नाटो से अलग होता है, तो रूस और चीन जैसे देशों की ताकत बढ़ सकती है। यूरोपीय देश अब अपनी रक्षा खर्च बढ़ाने और स्वतंत्र सुरक्षा व्यवस्था बनाने की दिशा में विचार कर रहे हैं।