क्या ईरान के साथ तनाव अमेरिका की राजनीति और अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है?
अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर ईरान का प्रभाव
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध का असर अब अमेरिका की अर्थव्यवस्था और राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही में रुकावट डालने से वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा हो गया है, जिसका सीधा असर अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर पड़ रहा है।
अमेरिका में डीजल की कीमतें 5 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई की चिंताएं बढ़ गई हैं। यह स्थिति राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है, क्योंकि इसका असर आगामी चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज: वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग
होरमुज़ जलडमरू, जो मध्य ईरान और ओमान के बीच स्थित है, एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। लगभग 20-22% कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद इसी मार्ग से गुजरते हैं, जबकि 20-25% एलएनजी की आपूर्ति भी यहीं से होती है।
हालांकि अमेरिका इस मार्ग से सीधे ज्यादा तेल का आयात नहीं करता, लेकिन इसकी रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं, जिसका प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जाता है।
ईरान की प्रतिक्रिया और उसके परिणाम
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने पहले से ही मिसाइलें तैनात कर रखी थीं और हमले की स्थिति में खाड़ी क्षेत्र के देशों को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी। प्रारंभिक हमलों के बाद यह माना जा रहा था कि ईरान कमजोर हो जाएगा, लेकिन हाल के हफ्तों में उसकी जवाबी कार्रवाई ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन जैसे देशों पर हमलों ने पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर दिया है।
ट्रंप के बयान और नाटो सहयोगियों की प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि ईरान इस तरह से प्रतिक्रिया देगा। उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि खुफिया एजेंसियां पहले ही ईरान की संभावित प्रतिक्रिया के बारे में चेतावनी दे चुकी थीं।
ट्रंप ने नाटो को 'एकतरफा व्यवस्था' बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की सुरक्षा पर भारी खर्च करता है, लेकिन जरूरत के समय वे साथ नहीं देते। उन्होंने कहा कि अमेरिका को किसी की मदद की आवश्यकता नहीं है और वह अकेले ही स्थिति को संभाल सकता है।
सहयोगियों की दूरी और ट्रंप की नाराजगी
ट्रंप ने ब्रिटेन और फ्रांस सहित अन्य नाटो देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने के लिए सैन्य सहयोग मांगा था, लेकिन अधिकांश देशों ने इस संघर्ष में शामिल होने से इनकार कर दिया। उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान अपनाने की अपील की।
ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के रुख से नाराज होकर इमैनुएल मैक्रों पर भी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि वह जल्द ही सत्ता से बाहर हो सकते हैं।
अमेरिका में राजनीतिक और आर्थिक संकट
नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर जो केंट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, यह कहते हुए कि ईरान से अमेरिका को कोई खतरा नहीं था और सैन्य कार्रवाई को गलत बताया। ट्रंप ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह अच्छा हुआ।
कतर ने कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और बहरीन से मिले समर्थन की सराहना की। वहीं, चीन के प्रति नरम रुख अपनाते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के संबंध अच्छे हैं और इससे आर्थिक लाभ हुआ है।
होर्मुज संकट ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि अमेरिका के भीतर भी इसके राजनीतिक और आर्थिक असर स्पष्ट रूप से दिखने लगे हैं। ट्रंप के बयानों और जमीनी हालात के बीच का अंतर इस पूरे घटनाक्रम को और जटिल बना रहा है।