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क्या ईरान के साथ समझौते की संभावना खत्म हो रही है? ट्रंप की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे वार्तालापों पर चिंता जताई है, यह कहते हुए कि ईरान की सैन्य ताकत कमजोर हो चुकी है। उन्होंने ईरान की शर्तों और NATO के समर्थन की कमी पर भी टिप्पणी की। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और ट्रंप की चेतावनियों का क्या मतलब है।
 

मिडिल ईस्ट में संघर्ष का 27वां दिन


मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है, और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है। इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के संदर्भ में तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ईरानी प्रतिनिधि समझौते के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन समय तेजी से बीत रहा है।


ट्रंप का Truth Social पर बयान

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान सार्वजनिक रूप से यह दिखा रहा है कि वह अमेरिकी प्रस्तावों पर विचार कर रहा है, जबकि उसके वार्ताकार समझौते के लिए गुहार लगा रहे हैं। उन्होंने ईरान के इस रुख को विरोधाभासी और असामान्य करार दिया।


ईरान की कमजोर सैन्य स्थिति

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य ताकत काफी कमजोर हो चुकी है और उसके फिर से मजबूत होने की संभावना बहुत कम है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने जल्द ही गंभीरता नहीं दिखाई, तो स्थिति उसके नियंत्रण से बाहर हो सकती है और फिर वापसी का कोई रास्ता नहीं बचेगा।


ईरान की शर्तें

ईरान ने अमेरिका के सामने अपनी शर्तें रखी हैं, जिसमें युद्ध का अंत उसकी शर्तों पर होना चाहिए। ईरान ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं, जिनमें हमलों और लक्षित हत्याओं पर रोक, सभी मोर्चों पर संघर्ष की समाप्ति, भविष्य में युद्ध रोकने के लिए ठोस व्यवस्था, युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय मान्यता देने की मांग शामिल है।


NATO पर ट्रंप की टिप्पणी

ट्रंप ने NATO पर भी निशाना साधा, यह कहते हुए कि ईरान के साथ चल रहे तनाव के दौरान नाटो देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया। उन्होंने कहा कि नाटो अब पहले जैसा मजबूत नहीं रहा है और उसकी सैन्य स्थिति कमजोर हो चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका को नाटो से किसी तरह की अपेक्षा नहीं है, लेकिन सहयोगी देशों को मौजूदा हालात को ध्यान में रखना चाहिए।


अंतरराष्ट्रीय मतभेद

ट्रंप की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका के नेतृत्व में उठाए जा रहे कदमों पर नाटो सहयोगियों ने खुलकर समर्थन नहीं दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संघर्ष को लेकर मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।