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क्या ओसामा बिन लादेन ने भारत को बनाया था अपने हमलों का लक्ष्य? जानिए नई रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ

एक नई CIA रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ओसामा बिन लादेन ने भारत को अपने संभावित हमलों के लक्ष्य के रूप में देखा था। 1998 की अवर्गीकृत रिपोर्ट में भारत का नाम शामिल है, लेकिन इसमें किसी विशेष साजिश का उल्लेख नहीं है। रिपोर्ट में बिन लादेन के नेटवर्क की व्यापकता और अमेरिका तथा ब्रिटेन के खिलाफ उसकी योजनाओं का भी जिक्र है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है और कैसे यह घटनाएँ 9/11 हमलों से जुड़ी हैं।
 

ओसामा बिन लादेन की योजनाएँ


नई दिल्ली: 11 सितंबर 2001 को हुए आतंकवादी हमलों से पहले, अल-कायदा के नेता ओसामा बिन लादेन ने भारत में हमले की योजना बनाई थी। 1998 में जारी एक अवर्गीकृत CIA रिपोर्ट में भारत का नाम उन देशों में शामिल किया गया था, जिन्हें बिन लादेन संभावित निशाना मानता था। यह जानकारी 9/11 हमलों की 25वीं वर्षगांठ से पहले सामने आई है।


CIA ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के लिए तैयार की गई एक खुफिया ब्रीफिंग के 100 से अधिक पन्नों की सामग्री को सार्वजनिक किया है। 28 अगस्त 1998 की एक प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ में बिन लादेन के आतंकवादी नेटवर्क को लगातार खतरे के रूप में दर्शाया गया था।


भारत और अन्य देशों पर बिन लादेन की नजर

भारत समेत कई देशों पर नजर


इस ब्रीफ में उल्लेख किया गया था कि बिन लादेन का इरादा मिस्र, अरब प्रायद्वीप के देशों, विशेषकर कुवैत, सऊदी अरब और यमन के अलावा भारत, पाकिस्तान, युगांडा और संभवतः नाइजीरिया में हमले करने का था। हालांकि, दस्तावेज में भारत से संबंधित किसी विशेष साजिश या हमले की तैयारी का कोई विवरण नहीं दिया गया है।


रिपोर्ट में खुफिया जानकारी के स्रोत को हटा दिया गया है, जिससे यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को लेकर यह आकलन किस आधार पर किया गया था।


अमेरिका और ब्रिटेन भी थे निशाने पर

अमेरिका और ब्रिटेन भी निशाने पर


CIA के अनुसार, बिन लादेन का नेटवर्क बहुत बड़ा था और यह कम से कम 60 देशों में फैला हुआ था। वह अमेरिका और ब्रिटेन के खिलाफ नए हमलों की योजना बना रहा था, लेकिन उस समय किसी निश्चित लक्ष्य या समय का संकेत नहीं मिला था।


ब्रीफिंग में यह भी बताया गया कि अमेरिकी अधिकारियों ने तिराना और संभवतः बाकू में बिन लादेन के कुछ सहयोगियों की गिरफ्तारी में मदद की थी। उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में उसके नेटवर्क की मौजूदगी को अमेरिकी हितों के लिए संभावित खतरे के रूप में देखा गया था।


बिन लादेन का नेटवर्क सक्रिय

मिसाइल हमलों के बाद भी सक्रिय था नेटवर्क


रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान में बिन लादेन और अन्य आतंकवादी नेता अमेरिकी मिसाइल हमलों से बच गए थे। उनका संचार तंत्र भी सक्रिय था। कुछ आतंकवादी शिविरों में प्रशिक्षण फिर से शुरू हो गया था, जबकि कुछ ठिकानों को स्थानांतरित किया जा रहा था।


यह ब्रीफ अगस्त 1998 में अफगानिस्तान और सूडान में संदिग्ध अल-कायदा ठिकानों पर अमेरिका के मिसाइल हमलों के बाद तैयार की गई थी। ये हमले केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावासों पर हुए बम धमाकों के जवाब में किए गए थे।


9/11 हमले का भयावह परिणाम

9/11 में करीब 3,000 लोगों की मौत


लगभग तीन साल बाद, 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा के 19 आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया। दो विमानों ने न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर की ट्विन टावर्स से टकराया, जिससे दोनों इमारतें ढह गईं। तीसरा विमान पेंटागन से टकराया, जबकि यूनाइटेड एयरलाइंस फ्लाइट 93 यात्रियों के प्रतिरोध के कारण पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। माना जाता है कि इसका लक्ष्य वॉशिंगटन का कोई प्रमुख स्थान था।


इन हमलों में अपहरणकर्ताओं सहित लगभग 3,000 लोगों की जान गई। इसके बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई शुरू की। लगभग एक दशक बाद, 2 मई 2011 को पाकिस्तान के एबटाबाद में अमेरिकी हेलीकॉप्टर कार्रवाई में ओसामा बिन लादेन को मार दिया गया।


भारत को लेकर कोई खास टारगेट नहीं

भारत को लेकर कोई खास टारगेट नहीं


जारी दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि 1998 में बिन लादेन के नेटवर्क की व्यापक पहुंच और विभिन्न देशों में संभावित हमलों की उसकी सोच का पता चलता है। भारत का नाम इस सूची में होना महत्वपूर्ण है, लेकिन दस्तावेज में भारत में किसी विशेष लक्ष्य या साजिश का कोई प्रमाण नहीं दिया गया है।