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क्या कहेंगे विदेश मंत्री एस. जयशंकर? UN महासभा में भारत की आवाज़ बनेगा उनका भाषण

इस साल की UN महासभा में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का भाषण महत्वपूर्ण होगा, जहां वे वैश्विक चुनौतियों और हाशिये पर पड़े देशों की चिंताओं को उठाएंगे। न्यूयॉर्क में होने वाले इस सत्र में, ब्राजील और अमेरिका के नेताओं के साथ-साथ जलवायु संकट और विकास के अधिकार पर भी चर्चा होगी। जानें इस महासभा में भारत की भूमिका और क्या उम्मीदें हैं।
 

नई दिल्ली में UN महासभा की तैयारी


नई दिल्ली: न्यूयॉर्क के मैनहटन में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के चारों ओर झंडों की सजावट और सुरक्षा इंतजाम जल्द ही अपने चरम पर पहुंच जाएंगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र 8 सितंबर से शुरू होने वाला है, और इस बार वैश्विक परिदृश्य सामान्य नहीं है। ईरान के मुद्दे पर अमेरिका और इजराइल के बीच बढ़ते तनाव ने होर्मुज जलडमरूमध्य तक अपनी छाप छोड़ी है, जिससे आम जनता पर ईंधन और खाद्य पदार्थों की कीमतों में वृद्धि का असर पड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर 26 सितंबर को दोपहर के सत्र में अपनी बात रखेंगे।


निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता

जब दुनिया सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही है, तब जयशंकर का भाषण केवल भारत की प्राथमिकताओं को बताने का माध्यम नहीं होगा। यह एक ऐसा अवसर है, जहां हाशिये पर पड़े देशों की चिंताओं को एक निष्पक्ष मंच पर उठाने का प्रयास किया जाएगा।


ब्राजील से शुरू होकर ट्रंप का संबोधन

आम बहस की शुरुआत 22 सितंबर को ब्राजील के नेता के संबोधन से होगी, जिसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपनी बात रखेंगे। इस वर्ष की अध्यक्षता बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के हाथ में है, जो इस आयोजन को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। पड़ोसी देशों के नेताओं, जैसे बांग्लादेश और नेपाल, का मंच साझा करने का कार्यक्रम 24 सितंबर को होगा, जबकि पाकिस्तान का संबोधन 25 सितंबर को होगा।


ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूती देने का प्रयास

युद्ध और महंगाई का सबसे अधिक प्रभाव उन देशों पर पड़ा है, जो सबसे कम विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं हैं। भारत का हमेशा से यही प्रयास रहा है कि इन देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जाए, और इस बार भी उम्मीद है कि जयशंकर का भाषण केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहेगा। सत्र के एजेंडे में जलवायु संकट, समुद्र के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित तटीय क्षेत्रों की समस्याएं, और भविष्य में महामारी से निपटने की तैयारियों पर चर्चा होगी। इसके अलावा, विकास के अधिकार की घोषणा के चार दशकों को लेकर विशेष आयोजन भी होंगे।