क्या डोनाल्ड ट्रंप के लिए मध्यावधि चुनाव साबित होंगे निर्णायक? जानें भारतीय मूल के उम्मीदवारों की भूमिका
मध्यावधि चुनाव की चुनौतियाँ
नई दिल्ली: अमेरिका में मंगलवार को होने वाले मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन गए हैं। इन चुनावों के परिणाम यह तय करेंगे कि उनके कार्यकाल के अंतिम दो वर्षों में रिपब्लिकन पार्टी कांग्रेस के दोनों सदनों पर नियंत्रण बनाए रख पाएगी या डेमोक्रेट्स को अधिक प्रभावी भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा। इस चुनावी मुकाबले में भारतीय मूल के उम्मीदवारों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मतदाता मुद्दे और चुनावी गणित
महंगाई, दैनिक खर्च, आव्रजन और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे मतदाताओं के निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं। यदि डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत प्राप्त करते हैं, तो वे ट्रंप प्रशासन के विधायी निर्णयों को रोकने और प्रशासन की गतिविधियों की जांच करने में सक्षम होंगे। वहीं, सीनेट का नियंत्रण महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायाधीशों की नियुक्तियों पर प्रभाव डालता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप के समर्थकों ने चुनाव प्रचार में भारी निवेश किया है, जिसमें मागा इंक ने लगभग 28 करोड़ डॉलर और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने लगभग 36.6 करोड़ डॉलर खर्च किए हैं।
मतदाता संख्या और चुनावी प्रक्रिया
अमेरिकी चुनाव सहायता आयोग के अनुसार, देश में 23.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। मतदान समाप्त होते ही वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी, और अगले दिन तक परिणाम आने की उम्मीद है। चुनाव से पहले किए गए एक सर्वेक्षण में, टेक्सास, कंसास, मेन, अलास्का, मिशिगन और ओहायो जैसे छह राज्यों में डेमोक्रेट्स को बढ़त दिखाई गई थी। इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है। प्रतिनिधि सभा में बहुमत के लिए 218 सीटें आवश्यक हैं। वर्तमान में, रिपब्लिकन के पास 219 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं, जबकि दो सीटें खाली हैं। डेमोक्रेट्स को बहुमत के लिए कम से कम चार सीटों का लाभ उठाना होगा। सीनेट में, रिपब्लिकन के 53 और डेमोक्रेट्स के साथ दो निर्दलीय सदस्यों समेत विपक्ष के 47 सदस्य हैं। यहां बहुमत के लिए डेमोक्रेट्स को चार सीटों का शुद्ध लाभ प्राप्त करना होगा।
भारतीय मूल के उम्मीदवारों की स्थिति
इन चुनावों में विवेक रामास्वामी ओहायो में गवर्नर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। न्यूयॉर्क में, सरिथा कोमातिरेड्डी अटॉर्नी जनरल के पद के लिए दौड़ में हैं, जबकि लॉस एंजेलेस में नित्या रमन मेयर पद की दौड़ में शामिल हैं। प्रतिनिधि सभा में रो खन्ना, प्रमिला जयपाल, सुहास सुब्रमण्यम और अमी बेरा भी दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं।
भारतीय-अमेरिकी मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, 66 प्रतिशत भारतीय-अमेरिकी उत्तरदाताओं ने डेमोक्रेट उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 18 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी। महंगाई, रोजगार, अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं उनके लिए प्रमुख मुद्दे हैं। मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान नहीं होता, लेकिन कांग्रेस का नियंत्रण बदल सकता है। प्रतिनिधि सभा का कार्यकाल दो साल और सीनेट सदस्यों का छह साल होता है। अमेरिका में नवंबर के पहले सोमवार के बाद आने वाले मंगलवार को मतदान कराने की परंपरा है।