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क्या डोनाल्ड ट्रंप को मिलेगा 'ट्रंप प्राइज'? जानें लिंडसे ग्राहम की चौंकाने वाली मांग

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि ट्रंप सऊदी अरब को इजरायल के साथ शांति समझौते के लिए राजी कर लेते हैं, तो 'नोबेल प्राइज' का नाम बदलकर 'ट्रंप प्राइज' रखा जाना चाहिए। इस लेख में जानें ट्रंप की चेतावनियों और अब्राहम अकॉर्ड के महत्व के बारे में।
 

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में चल रहे गंभीर सैन्य संघर्ष के बीच वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ गई है। हाल ही में बंदर अब्बास पर अमेरिकी हवाई हमलों और ईरान द्वारा कुवैत स्थित अमेरिकी एयरबेस पर हमले के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है।


अमेरिकी राजनीति में ट्रंप का कूटनीतिक प्रयास

सुलगती आग और युद्ध का माहौल


इस संकट के बीच, अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना करते हुए एक अनोखी मांग की है।


ट्रंप को ना कहना पड़ सकता है भारी


फॉक्स न्यूज से बातचीत में ग्राहम ने कहा कि यदि ट्रंप सऊदी अरब को इजरायल के साथ ऐतिहासिक शांति समझौते के लिए राजी कर लेते हैं, तो 'नोबेल प्राइज' का नाम बदलकर 'ट्रंप प्राइज' रखा जाना चाहिए। उन्होंने अरब सहयोगियों को सलाह दी कि उन्हें ट्रंप की मदद करनी चाहिए, क्योंकि उन्हें 'ना' कहना किसी के लिए भी खतरनाक हो सकता है।


ट्रंप की चेतावनी

ट्रंप की चेतावनी


डोनाल्ड ट्रंप मिडिल ईस्ट के संकट को हल करने के लिए ईरान के साथ किसी भी संभावित समझौते को 'अब्राहम अकॉर्ड' के विस्तार से जोड़कर देख रहे हैं। उन्होंने प्रमुख मुस्लिम देशों से अपील की है कि वे इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंधों को सामान्य करने वाले इस समझौते का हिस्सा बनें।


अब्राहम अकॉर्ड का महत्व

ट्रंप ने क्या कहा


अमेरिकी राष्ट्रपति ने खाड़ी देशों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उन्हें तुरंत इस संधि पर हस्ताक्षर करने चाहिए, क्योंकि वे अमेरिका के प्रति जिम्मेदार हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि यदि खाड़ी देश इस समझौते से पीछे हटते हैं, तो अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने शांति प्रयासों को सीमित कर सकता है।


क्या है अब्राहम अकॉर्ड?


अब्राहम अकॉर्ड की स्थापना 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान हुई थी। इसका नाम पैगंबर इब्राहीम के नाम पर रखा गया है, जिन्हें यहूदी, ईसाई और इस्लाम में सम्मानित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य इजरायल और अरब देशों के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को समाप्त करना है।


मिडिल ईस्ट का इतिहास

मिडिल ईस्ट का इतिहास


इस समझौते के तहत सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ संबंध स्थापित किए, इसके बाद मोरक्को और सूडान भी शामिल हुए। अमेरिका का मानना है कि यह मिडिल ईस्ट के इतिहास का सबसे बड़ा शांति प्रयास है, जिसके सफल होने पर क्षेत्र में व्यापार, तकनीक और सुरक्षा का नया ढांचा बनेगा।